करनैलगंज। विकास खंड करनैलगंज क्षेत्र में पिछले एक माह से डेंगू का कहर जारी है। कस्बे में दो दिन में तेज बुखार और डेंगू के लक्षण वाले दो मरीजों की मौत हो गयी। नगर के लोगों की डेंगू बुखार से हो रही मौत से परिवार के अलावा कस्बे के लोगों में हड़कम्प मच गया है। नगर के करीब आधा दर्जन से अधिक लोगों का इलाज लखनऊ के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। करनैलगंज नगर के निजी चिकित्सकों के यहां भी कई लोगों का इलाज चल रहा है। जबकि कस्बे के सीएचसी के चिकित्सक घटना से अंजान बने हैं।
पिछले एक माह से कस्बे व आसपास के क्षेत्र में डेंगू का कहर बरपा है कई लोगों की लखनऊ में मौत हो चुकी है। कस्बे में बीते 24 घंटे में एक ही मोहल्ले के दो लोगों की तेज बुखार और डेंगू के लक्षण से मौत हुई। करनैलगंज नगर के मोहल्ला गांधी नगर निवासी हरिशंकर की पुत्री नंदिनी (18) को कई दिनों से बुखार था। उसके शरीर में दाने निकलने एवं उल्टियां होने की शिकायत थी। बुखार से लगातार उसका प्लेटलेट्स गिरती चली गई। जांच में उसको डेंगू की पुष्टि हुई। उसकी हालत काफी बिगड़ती जा रही थी। उसका कस्बे में ही निजी चिकित्सालय में इलाज चल रहा था।
आखिरकार शुक्रवार को उसने दम तोड़ दिया। ठीक इसी तरह नगर के इसी मोहल्ले के लाल जी मिश्रा (55) को तीन दिन से बुखार हो रहा था। शनिवार की सुबह तेज बुखार होने पर एक निजी चिकित्सक के यहां ले जाया गया। जहां प्लेटलेट की जांच कराई गई जांच में उनका प्लेटलेट बहुत कम पाया गया। देर शाम चिकित्सक ने उन्हें लखनऊ ले जाने की सलाह दी। थोड़ी ही देर बाद उन्हें खून की उल्टी हुई व नाक से खून आ गया। कुछ ही देर बाद अचानक उनकी मौत हो गई। मृतक लाल जी मिश्रा के पुत्र हरि ओम मिश्रा ने बताया कि करनैलगंज में उनका इलाज एक निजी चिकित्सक के यहां हो रहा था। खून की जांच कराए जाने के बाद यह पता चला कि लगातार उनका प्लेटलेट्स गिरती जा रही है।
कोई भी चिकित्सक डेंगू बीमारी की पुष्टि करने से कतरा रहा है। जब उन्हें लखनऊ ले जाने के लिए कहा गया और इलाज कराने के लिए लखनऊ ले जाने की तैयारी की गई उसी बीच उनके पिता की मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि न्यायालय द्वारा जब से डेंगू की बीमारी व उससे होने वाली मौत पर लगाम लगाने के साथ-साथ 25 लाख रुपये दिए जाने की घोषणा हुई है। उसके बाद से कोई भी निजी या सरकारी चिकित्सक डेंगू के लक्षण होने के बावजूद भी बीमारी बताने से कतरा रहा है। जिसका खामियाजा उन्हें अपने पिता को खो कर भुगतना पड़ा। इस बारे में सीएचसी के चिकित्सक भी अनजान बने हैं। इस मुद्दे पर सीएचसी के जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. सुरेश चंद्रा से दूरभाष पर सम्पर्क नही हो सका। सीएचसी के चिकित्साधिकारी डॉ. मुदस्सिर ने बताया कि उन्हें कस्बे में डेंगू से किसी मरीज के मरने की कोई जानकारी नही है और न ही इस तरह का कोई मरीज भी अस्पताल तक लाया गया। लगातार बुखार व डेंगू की जानकारी व जागरूकता क्षेत्र में दी जा रही है। दवाओं का छिड़काव भी कराया जा चुका है।