गोंडा। बैराजों से छोड़ा जा रहा पानी गांवों में तबाही मचा रहा है। शनिवार को नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई। खतरे के निशान से 56 सेंटीमीटर ऊपर बह रही नदी अब घटकर सात सेंटीमीटर पर आ गई है। इससे नदी के उफान पर तो अंकुश लगा है लेकिन कटान तेज हो गई है। इससे तटबंध के साथ ही गांवों में कटान का खतरा बढ़ गया है।
तीन दिन से नदी के तेवर से बाढ़ का संकट गहरा गया है। तरबगंज व करनैलगंज की 20 पंचायतों के 100 से अधिक गांव पानी से घिर गए हैं और बाढ़ का संकट बना हुआ है। कई गांवों के लोग पलायन कर चुके हैं। नवाबगंज, उमरीबेगमगंज के साथ ही करनैलगंज के तटबंधों पर लोग शरण लिए हैं। प्रशासन ने तरबगंज में पीड़ितों का राहत सामग्री का वितरण शुरू कर दिया है।
एडीएम सुरेश कुमार सोनी व जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव ने शनिवार को जैतपुर माझा बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण किया। एडीएम ने तरबगंज तहसील में बनाए गए अस्थाई कैंप का निरीक्षण किया। तरबगंज विधायक प्रेमनरायन पांडेय ने उमरीबेगमगंज में बाढ़ पीड़ितों को प्रदेश सरकार की ओर से राहत सामग्री का वितरण किया। इस दौरान एसडीएम तरबगंज भारत भार्गव, क्षेत्राधिकारी संजय तलवार, तहसीलदार तरबगंज पुष्कर मिश्र, जिला पंचायत सदस्य रामधोख मिश्रा, प्रधान ऐली मनीराम यादव, राजू सिंह, अनुज शुक्ला, भानु प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
नवाबगंज संवाद के मुताबिक तीन दिन तक तबाही मचाने के बाद सरयू का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है। मगर माझा के रहने वाले लोगों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। नदी के घटते जलस्तर से कटान का खतरा बढ़ गया है। जिससे लोगों से भय व्याप्त है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सरयू के जलस्तर में कमी आई है। मगर नदी अभी भी खतरे के निशान से 24 सेमी ऊपर बह रही है। नदी का पानी घटने से लोगों ने राहत की सांस ली है। मगर तटीय इलाकों के लोगों में अभी भी भय बना हुआ है। पानी घटने के साथ ही दत्तनगर, गोकुला, साखीपुर, तुलसीपुर माझा सहित तटवर्ती क्षेत्रों की जमीन कटान की जद में आ गई है। गांव के रास्तों में अभी भी पानी भरा होने से लोग नाव से आवागमन कर रहे हैं। खेतों में पानी भरा होने से सैकड़ों एकड़ फसलें नष्ट हो गईं हैं। लोगों को पशुओं के चारे की भी दिक्कत आ रही है। प्रशासन के द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा तो किया गया है। मगर अभी तक किसी को कोई राहत सामग्री नहीं दी गई है। गांव के रामसुफल यादव सहित दर्जनों परिवार पलायन कर चुके हैं।
परसपुर क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में मवेशियों को गलाघोंटू आदि बीमारियों से बचाने के लिए 24 हजार 756 पशुओं का टीकाकरण कर दवा का वितरण शनिवार को हुआ। प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी परसपुर डॉ. त्रिवेणी कुमार ने बताया कि क्षेत्र में भौरीगंज, चरसड़ी व पसका बाढ़ राहत चौकी पर पशुओं का टीकाकरण किया गया है। पसका क्षेत्र में 5,456 व भौरीगंज क्षेत्र में 19,300 पशुओं का टीकाकरण हुआ है। परसपुर क्षेत्र का ग्राम पसका का चंदापुर किटौली, धुसवा पासिन पुरवा, बिचला मांझा इकनिया मांझा, नाऊपुरवा, बिचला मांझा आदि गांव बाढ़ग्रस्त हैं।