गोंडा के भिखारीपुर-सकरौर रिंग बांध की मरम्मत के लिए बोल्डर उतारते श्रमिक। स्रोत: विभाग
गोंडा। करनैलगंज और तरबगंज तहसील क्षेत्र की लाखों की आबादी को बाढ़ से बचाने की योजनाओं पर कार्य शुरू हो गया है। बांध की मरम्मत के साथ ही ठोकर और स्पर निर्माण कराया जा रहा है। अधिकारी बरसात से पहले कार्य पूरा कराने का दावा कर रहे हैं।
जिले में बाढ़ से बचाव की तैयारियों पर अमर उजाला ने बीते मार्च महीने में बाढ़ बचाव के इंतजाम को इंतजार शीर्षक से अभियान शुरू किया। करीब 15 दिन के अभियान का असर अब दिखने लगा है। तटबंध की मरम्मत के कार्य ने तेजी पकड़ ली है।
करनैलगंज क्षेत्र में बीते वर्ष बाढ़ के दौरान नदी कटान करते हुए अपनी धारा को बांध के नजदीक ले आई थी। उस समय बाढ़ और बरसात का अंतिम चरण चल रहा था। जलस्तर कम होने से बाढ़ को रोकना आसान हो गया था। ग्रामीण आशंका जता रहे थे कि इस वर्ष नदी का जलस्तर बढ़ने पर धारा बांध के किनारे से बहना शुरू करेगी। जो किसी खतरे से कम नहीं है।
ग्राम चंदापुर किटौली के पास दो साल पहले बांध की मजबूती का कार्य कराया गया था। अब वही स्थिति बहुवन मदार मांझा के पास की है। एल्गिन चरसड़ी बांध वर्ष 2007 से 2014 के बीच चार बार कट चुका है। हालांकि, विभाग ने दोनों तटबंधों की मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया है।
अधीक्षण अभियंता मनोज कुमार साहू का कहना है कि 30 मार्च से बांध की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है। कुल आठ परियोजनाओं पर कार्य कराया जाना है। छह पर कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम से पहले कार्य पूरा करा दिया जाएगा।
88 ग्राम पंचायतें होती हैं प्रभावित
करनैलगंज तहसील के परसपुर, करनैलगंज ब्लॉक की 64 ग्राम पंचायत के 293 मजरे बाढ़ से प्रभावित होते हैं। बांध का निर्माण होने बावजूद तीन ग्राम पंचायतों के 18 मजरे प्रतिवर्ष जलस्तर बढ़ने पर जलमग्न हो जाते हैं। इसी तरह तरबगंज के दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं।