डॉ. मोहन यादव, उच्च शिक्षा मंत्री, मध्यप्रदेश। - संवाद
गोंडा। मध्य प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय कुश्ती महासंघ के विवाद को महाभारत कालीन कौरवों और पांडवों जैसे धर्मयुद्ध की संज्ञा दे डाली। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष कांग्रेस के ‘प्री-प्लान’ इस विवाद का हिस्सा ऐसे बन गया है, जैसे कौरवों ने पांडवों से राज्य छीनने की कोई जुगत नहीं छोड़ी थी। उन्होंने कहा- रेसलिंग फेडरेशन के अखिल भारतीय स्तर पर होने वाले चुनाव में फिर से भाजपाई ही काबिज होंगे। इस मुद्दे पर भी विपक्ष मुंह की खाएगा।
गोंडा पहुंचे डॉ. मोहन यादव ने बातचीत के दौरान 30 जून तक भारतीय कुश्ती महासंघ की नई कमेटी के निर्वाचन के सवाल पर जवाब दिया कि भाजपा के लोग कहीं भी कमजोर नहीं हैं। खुद के चुनाव लड़ने का सवाल वह टाल गए मगर कहा कि फेडरेशन के कानून में संशोधन किया जा सकता है। कोई जरूरी नहीं कि बृजभूषण चौथी बार अध्यक्ष का चुनाव न लड़ें। यह भी आवश्यक नहीं कि चुनाव 30 तक हो ही जाएं। आगे भी बढ़ सकते हैं।
यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे सांसद बृजभूषण शरण सिंह का बचाव करते हुए डॉ. मोहन यादव उनके पक्ष में दिखे, जबकि हरियाणा के प्रदर्शनकारी पहलवानों को निशाने पर रखा। कहा- कुश्ती महासंघ में उठापटक पहले से चली आ रही है। हरियाणा कुश्ती संघ और हुड्डा परिवार ने कुश्ती जैसे पवित्र खेल को सिर्फ नौकरी का जरिया बना दिया था। हरियाणा के पहलवान दूसरे राज्यों से नेशनल गेम्स में भाग लेकर केवल नौकरी की फिराक में रहते थे। उन्होंने देश के लिए खेलने की कभी चिंता नहीं की। डॉ. मोहन बोले- हरियाणा के ‘एक परिवार-एक अखाड़े’ की ‘दुरभिसंधि’ से अन्य राज्यों के मेहनती और होनहार पहलवानों को उचित स्थान नहीं मिल पाता था। भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष के तौर पर बृजभूषण शरण सिंह ने अन्य राज्यों के कुश्ती संघों की शिकायत पर इसे रोका। यहीं से वह हरियाणा के खास परिवार-अखाड़े को खटकने लगे। उनके खिलाफ साजिशें शुरू हो गईं। ‘एक परिवार-एक अखाड़े’ का वर्चस्व खात्मे की कगार पर है।
एमपी रेसलिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष के साथ-साथ डॉ. मोहन यादव खुद भी पहलवान रहे हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन (दक्षिण) से विधायक और मध्य प्रदेश ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि कुश्ती सद्विचार का सबसे बड़ा प्रमाणपत्र है। कुश्ती का खिलाड़ी कहीं भी खुलेआम सड़क पर गुंडागर्दी करते नहीं दिखेगा। वह अनुशासित रहता है मगर अन्याय भी कभी बर्दाश्त नहीं करता। बैडमिंटन, क्रिकेट या स्वीमिंग का प्लेयर कभी शरीर से पहचाना नहीं जा सकता, मगर शरीर देखने से ही पता लग जाता है कि यह कुश्ती का खिलाड़ी है।