घाघरा नदी से गुरुवार को तालाब के रास्ते ऐली-परसौली गांव के मजरा केवटाही पहुंचे मगरमच्छ से गांव में दहशत फैल गई। लोग जब तक कुछ समझते, वह गांव से कुछ दूर अरहर के खेत में जाकर छिप गया।
इस पर लोगों ने वन विभाग के अधिकारियों को फोन कर उनसे मदद की गुहार लगाई। लेकिन जब काफी देर तक कोई वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा तो ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाते हुए अरहर के खेत को घेर लिया और लाठी-डंडा, रस्सी के सहारे उसे पकड़ लिया।
काफी देर गांव में पेड़ से मगरमच्छ को बांधे रखने के बाद ग्रामीणों ने उसे वन विभाग को सौंप दिया। उप प्रभागीय वनाधिकारी गोपाल ओझा ने बताया कि मगरमच्छ को सुरक्षित उसके प्रवास घाघरा नदी में छोड़ने के लिए टीम गांव में भेजी गई है।
सुबह ऐली-परसौली गांव के मजरा केवटाही में कुछ लोग खेत की तरफ गए थे। जहां उन्हें खेत में एक मगरमच्छ दिखा दिया।
ग्रामीणों ने इसकी सूचना तत्काल वनकर्मियों को दी, लेकिन जब काफी देर तक वन विभाग को कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा तो लोगों ने अरहर के खेत को चारो ओर से घेर लिया।
करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद वह 10 फीट लंबे मगरमच्छ को रस्सी डालकर पकड़ने में कामयाब रहे।
इसके बाद दोपहर तीन बजे पहुंचे वनकर्मियों को गांव वालों ने मगरमच्छ उनके हवाले कर दिया।
उप प्रभागीय वनाधिकारी गोपाल ओझा ने बताया कि ऐली परसौली गांव से उनके पास मगरमच्छ की सूचना आई थी। जिसके बाद मौके पर तरबगंज के रेंजर मो. इलियास को गांव जाने के निर्देश दिए गए थे।
मो. इलियास से उनकी बात हुई है, वह मौके पर हैं और मगरमच्छ को उसके प्राकृतिक प्रवास घाघरा नदी में छोड़ने जा रहे हैं। उनके साथ वन्यजीव विशेषज्ञ जफर वारसी को भी भेजा गया है। ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए मगरमच्छ का वजन करीब डेढ़ कुंतल व लंबाई 10 फीट बताई जा रही है।