गोंडा। शिक्षकों की कमी के कारण जिले में संस्कृत शिक्षा पर संकट बढ़ता जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के नियंत्रण के 21 सहायता प्राप्त संस्कृत स्कूल हैं, जो शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।
21 स्कूलों में सिर्फ 63 शिक्षक ही हैं। इससे पढ़ाई सही ढंग से नहीं हो पा रही है और लोगों का संस्कृत शिक्षा से मोह भी भंग हो रहा है। कई सालों से संस्कृत स्कूलों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति भी नहीं हुई है।
कक्षा 6 से 12 तक के 21 संस्कृत स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होती नहीं दिख रही। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक भर्ती की प्रक्रिया ठप्प ही चल रही है। बताया जा रहा है कि 28 मार्च 2018 को शासन ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद विनियमावली 2009 में संशोधन के बाद सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के चयन का अधिकार चयन बोर्ड को दे दिया था।
इसके बाद उम्मीद जगी थी कि जल्द ही नए शिक्षक मिलेंगे। जिले में स्कूल का संचालन बेहतर रखने के लिए ही तत्काल 42 के करीब शिक्षकों की जरूरत है। शिक्षकों के न मिलने से स्कूलों में पढ़ाई अव्यवस्थित हो गई है।
संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई बार प्रयास भी हुए। डायट में बीते साल संस्कृत संस्थानम की ओर से सेमिनारों का आयोजन किया गया। इसमें 200 से अधिक प्राइमरी शिक्षकों को प्रशिक्षित भी किया गया, लेकिन आगे यह अभियान नहीं चल सका। माना जा रहा है कि शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास धरातल पर नहीं उतर रहे हैं।