वेतन व समायोजन की मांग को लेकर साधन सहकारी समिति के कर्मचारियों की हड़ताल ने किसानों को बेहाल कर दिया है। कृषि मंत्री के जिले में किसान खाद व बीज के लिए भटक रहे हैं। समिति के कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से किसानों को खाद व बीज नहीं मिल पा रहा है।
इस वजह से किसानों को निजी दुकानदारों से महंगे दामों पर खाद बीज की खरीदारी करनी पड़ रही है। खेती के लिए उपयुक्त इस मौसम में किसानों को खाद व बीज न मिलने से खेती पर संकट के बादल छा गए हैं।
किसानों को सरकारी दरों पर खाद व बीज उपलब्ध कराने के लिए जिले में 144 साधन सहकारी समितियां संचालित हैं। इन समितियों से किसानों को आसानी से खाद व बीज मिल जाते हैं। लेकिन वेतन व समायोजन की मांग को लेकर साधन सहकारी कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस हड़ताल से किसानों को सरकारी दरों पर खाद बीज का मिलना दुश्वार हो गया है।
किसान खाद व बीज खरीदने के लिए भटक रहे हैं लेकिन कृषि मंत्री का जिला होने के बावजूद अधिकारी किसानों की बात सुनने को तैयार नही हैं। इस स्थिति में किसान निजी दुकानदारों के यहां से महंगे दामों पर खाद व बीज खरीदने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों से मिलने वाली खाद व बीज की गुणवत्ता को लेकर कोई शंका नहीं रहती।
महंगे दामो पर खाद खरीद रहे किसान
समितियों की हड़ताल से निजी खाद व बीज विक्रेताओं की चांदी हो गई है। सरकारी गोदामों पर खाद न मिलने से किसानों को महंगे दामों पर खाद व बीज की खरीददारी करनी पड़ रही है। इन दुकानों पर 348 रुपये में मिलने वाली यूरिया खाद 375 रुपये व 1190 रुपये की डीएपी खाद 1250 रुपये में बेची जा रही है और सब कुछ जानने के बावजूद किसान इन दामों पर खाद खरीदने को मजबूर हैं।
बीज की सब्सिडी से भी वंचित होंगे
सहकारी समितियों व कृषि गोदामों पर धान का बीज 30 रुपये किलो में उपलब्ध है। इसमें ये 6 रुपये किसानों को सब्सिडी के रूप में वापस मिलता है। लेकिन समितियों की हड़ताल से किसान बीज की खरीदारी भी निजी दुकानदारों से कर रहे हैं। ऐसे में किसानों को मिलने वाली 6 रुपये की सब्सिडी नहीं मिल पाएगी।