जिला महिला अस्पताल में रविवार को एक प्रसूता के भाई ने स्टाफ पर बच्चा बदलने का आरोप लगाते हुए नगर कोतवाली में तहरीर दी है। उसने अस्पताल के स्टाफ पर 3500 रुपये अवैध वसूली करने का भी आरोप लगाया है।
अस्पताल की सीएमएस ने प्रसूता व उसके परिवारीजनों को पैसा वापस कराकर भगा दिया। वहीं, प्रसूता के भाई की तहरीर पर पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है। हालांकि सीएमएस ने आरोप को झूठा बताया है।
बलरामपुर देहात थाना क्षेत्र के ग्राम चंदनजोत साखीरेत निवासी रामगोपाल ने नगर कोतवाली में दी गई तहरीर में कहा है कि शनिवार शाम उसने ललिया के ग्राम कोड़री निवासी अपनी बहन बड़का पत्नी मुंशीराम को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था।
रविवार सुबह पौने आठ बजे नर्स ने बताया कि बड़का को मरा हुआ लड़का पैदा हुआ है और नर्स ने 3500 रुपये भी जमा कराए। इसके बाद उसने एक नवजात का शव देकर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया।
परिवारीजन शव दफनाने राप्ती नदी के सिसई घाट पहुंचे तो उसे नहलाने के दौरान देखा कि नवजात लड़का नहीं बल्कि लड़की है। परिवारीजनों ने शव दफना दिया और अस्पताल जाकर बताया कि नवजात लड़का नहीं लड़की थी। नर्स ने चैलेंज किया तो परिवारीजन शव कब्र से निकालकर अस्पताल ले आए। शव देखते ही नर्स का बयान बदल गया और वह कहने लगी कि मैंने लड़की का जन्म होने की बात ही कही थी।
परिवारीजनों का आरोप है कि मामला बढ़ता देख सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने उनके 3500 रुपये वापस दिलाकर अस्पताल से भगा दिया। परिवारीजनों का आरोप है कि अस्पताल में उनका बच्चा बदल दिया गया और इसमें सीएमएस की भी मिलीभगत है। रामगोपाल ने पुलिस से मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। नगर कोतवाल एसके त्रिपाठी ने बताया कि प्रसूता के भाई की तहरीर पर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. नीना वर्मा का कहना है कि, रामगोपाल के आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। रविवार को अस्पताल में दो प्रसव हुए हैं। बड़का को मरी हुई लड़की तथा दूसरी प्रसूता को लड़का पैदा हुआ था। डॉ. नीना का कहना है कि, वह पुलिस की जांच में पूरा सहयोग करेंगी।