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रेल लाइन तो कहीं खतरे में गांवों का वजूद

Sat, 10 Sep 2016 11:36 PM IST
गोंडा
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गोंडा में कौड़िया बाजार में शनिवार को बिरवा गांव की खदान से खनन कर बालू ले जाती ट्रैक्टर -ट्राली - फोटो : अमर उजाला
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साल 2010-11 में नवाबगंज की चकरसूल रेलवे क्रॉसिंग पर हुई दुर्घटना अभी भी लोगों को याद है। इस हादसे में बालू भरे ट्रक के अयोध्या पैसेंजर ट्रेन से टकराने में जहां 21 श्रद्धालुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी थी तो वहीं तीन दर्जन से ऊपर श्रद्धालु घायल हो गए थे।
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बावजूद इसके 6 साल बीतने को है, लेकिन न तो चकरसूल में अवैध बालू खनन बंद हो पाया है न ही इसके माफिया पर प्रशासन कोई अंकुश लगा सका है। हालांकि इधर अवैध खनन पर हुई सख्ती के बाद इसका काम यहां कुछ दिनों के लिए जरूर बंद हो गया है। लेकिन चोरी-छिपे अभी भी हो रहा है। यही वजह है कि नवाबगंज में कटरा रेलवे लाइन से 500 मीटर की दूरी पर बसे गांव अवैध बालू खनन माफिया का गढ़ बन चुके हैं।

नवाबगंज में बालू खनन का कहीं कोई लाइसेंस किसी के पास नहीं है। अगर कहीं कोई खनन हो भी रहा है, तो वह चोरी छिपे ही होता होगा। टीमों को लगाकर खनन करने वाले लोगों पर नकेल कसी जाएगी। -रामसजीवन मौर्या, एसडीएम तरबगंज
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रेल लाइन के इर्द-गिर्द हो रहा खनन : नवाबगंज में रेलवे लाइन से आधा किलोमीटर दूर कल्यानपुर और चकरसूल, दो ऐसे गांव हैं, जहां अवैध बालू खनन का धंधा बीते कई वर्षों से फल-फूल रहा है। यह दोनों इलाके रेलवे लाइन से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर हैं।

बावजूद इसके इस जगह की महत्ता को जिला प्रशासन और रेलवे दोनों ही कोई तवज्जो नहीं दे रहे। जो आगे चलकर एक बड़े खतरे का सबब बन सकता है। एनजीटी (नेशल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के मामले में हस्तक्षेप किए जाने के बाद यहां बड़े पैमाने पर होने वाला खनन जरूर बंद हो गया है। लेकिन खनन अभी भी चोरी-छिपे किया जा रहा है। 
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