ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे वन विभाग के डिप्टी रेंजर अंगद पाण्डेय जहां उसकी मौत स्वाभाविक कारणों से मान रहे हैं, वहीं उप प्रभागीय वनाधिकारी गोपाल ओझा ने मौत के कारणों की पड़ताल के लिए हर संभव जांच की बात कही है।
बताते हैं कि एक महीने पहले सरयू नदी के किनारे बसे गांव कचनापुर के घाट पर एक मगरमच्छ ग्रामीणों को दिखाई दिया था। जिसकी सूचना ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को दी। जहां से वन विभाग के अधिकारी मौके पर भी पहुंचे। लेकिन ग्रामीणों को थोड़ी-बहुत हिदायत देने के बाद वहां से चले गए।
इसके बाद कभी इस घाट तो कभी उस घाट पर यह मगरमच्छ लोगों को नजर आता रहा। जिससे ग्रामीणों ने खतरे का अंदेशा भी जताया। बावजूद इसके मगरमच्छ को आबादी वाले इलाके से बाहर छोड़ने की व्यवस्था नहीं की गई।
वहीं बुधवार की सुबह कचनापुर घाट के ही नजदीक सरयू नदी में जब यह मगरमच्छ एक बार फिर स्थिर पानी में दिखाई दिया तो पूरे गांव के लोग उसे देखने के लिए जमा हो गए। किसी ने कंकड़ मारा तो किसी ने लाठी से उसे जगाने की कोशिश की।
लेकिन जब पानी में उसकी कोई हरकत काफी देर तक नहीं दिखी तो तत्काल ग्रामीणों ने फिर से इसकी सूचना वन विभाग को दी। जहां से मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने मगरमच्छ का शव पानी से निकलवाकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
वन विभाग में तैनात करनैलगंज के डिप्टी रेंजर अंगद पाण्डेय की मानें तो मगरमच्छ की मौत स्वाभाविक कारणों से हुई है। जबकि मगरमच्छ के दोनों पैरों में बंधी रस्सी उसकी हत्या की ओर इशारा कर रही है।
जिसकी नदी में मछली व कछुओं का शिकार करने वाले शिकारियों ने हत्या कर दी और शव को पानी में फेंक दिया। फिलहाल मगरमच्छ के शव को करनैलगंज में लाए जाने के बाद तीन डॉक्टरों का एक पैनल शव का पोस्टमार्टम करने में लगा है।
उप प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. गोपाल ओझा ने बताया कि मगरमच्छ के शव का उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी वर्मा के नेतृत्व में तीन डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। जिसके बाद उसके बिसरे को जांच के लिए बाहर भेजा जाएगा। रही बात मगरमच्छ की हत्या व स्वाभाविक मौत की तो इसकी जांच हर पहलू को ध्यान में रखते हुए की जाएगी।
हत्या पर दो से 7 साल की सजा का प्राविधान
वन्यजीव अधिनियम के तहत जलचर प्राणी मगरमच्छ शेड्यूल वन का जानवर है। जिसे मारने पर दो से 7 साल तक की सजा का प्राविधान है।
ऐसी स्थिति में अगर करनैलगंज में मृत मिले मगरमच्छ की वाकई में शिकारियों ने हत्या की है तो इसके दोषियों पर दो से 7 सात साल तक की सजा हो सकती है। वहीं आम तौर पर मगरमच्छ बहते हुए पानी में पाए जाते हैं। जबकि सरयू नदी का पानी कुछ हद तक स्थिर रहता है। यही वजह है कि शिकारी इस नदी में जहां-जहां जाल लगाकर मछलियों का शिकार भी करते रहते हैं।
इसलिए माना जा रहा है कि रास्ता भटककर घाघरा से सरयू नदी में पहुंचे इस मगरमच्छ से शिकारियों की मुश्किलें भी बढ़ गई थीं। जिसके कारण उन्होंने इसे ठिकाने लगा दिया। हालांकि एसडीओ गोपाल ओझा का कहना है कि मगरमच्छ सरयू नदी में भी पाया जाता है।