एफटीसी द्वितीय न्यायाधीश ने हत्या के मामले में दो लोगों को आरोपी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायाधीश ने आरोपियों को 15-15 हजार रुपये अर्थदंड अदा करने का भी आदेश दिया है। साक्ष्यों के अभाव में न्यायाधीश ने एक आरोपी को बरी कर दिया।
ललिया थाना क्षेत्र के गंगाबक्श भागड़ गांव निवासी मनीराम ने प्रार्थना पत्र दिया कि उसके पुत्र सर्वजीत को राजेश व शत्रोहन 29 जनवरी 2009 को बाजार से बुला ले गए। वादी का आरोप था कि दोनों ने मिलकर उसके पुत्र की हत्या कर दी।
पुलिस ने मुकदमा लिखकर विवेचना शुरू की तथा शव को तालाब से बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने राजेश व शत्रोहन को हत्या व शव को छिपाने का आरोपी माना तथा एक अन्य बाबूराम को घटना का साजिशकर्ता बताते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव ने नौ गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी द्वितीय न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार सिंह ने राजेश व शत्रोहन को हत्या का आरोपी मानते हुए कठोर आजीवन कारावास व 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
जुर्माना अदा ने करने पर आरोपियों को डेढ़-डेढ़ वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश न्यायाधीश ने दिया है। साक्ष्यों के अभाव में न्यायाधीश ने बाबूराम को बरी कर दिया।