एडीजे प्रथम ने शुक्रवार को सामूहिक दुराचार व हत्या का आरोपी मानते हुए पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने आरोपियों को 20-20 हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है। न्यायाधीश ने अर्थदंड की राशि का तीन चौथाई हिस्सा मुआवजे के रूप में वादी मुकदमा को देने का आदेश भी दिया है।
नगर कोतवाली क्षेत्र के एक व्यक्ति ने थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था कि उसके भाई केशवराम से उसका झगड़ा चल रहा था। वादी की लड़की तीन अक्टूबर 2013 को खेत में नित्यकर्म के लिए गई थी। वादी का आरोप था कि उसके भाई केशवराम व भतीजे गान्हू, ननके, पिल्लू तथा पारस ढाढी ने लड़की को गन्ने के खेत में खींच लिया।
इन लोगों ने लड़की के साथ सामूहिक दुराचार किया तथा जान से मार डाला। वादी के प्रार्थना पत्र पर पुलिस ने रिपोर्ट लिखकर विवेचना शुरू की। विवेचक ने सभी गवाहों का बयान अंकित कर हत्या व सामूहिक दुराचार का आरोपी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
सरकारी अधिवक्ता गोमती प्रसाद त्रिपाठी ने नौ गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एडीजे प्रथम उमेश चंद्र शर्मा ने पांचों लोगों को सामूहिक दुराचार व हत्या का दोषी माना।
सरकारी अधिवक्ता ने घटना को क्रूरतापूर्ण बताते हुए आजीवन कारावास व फांसी की सजा देने की मांग की। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने न्यूनतम सजा दिए जाने की दलील दी। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद एडीजे प्रथम ने केशवराम, गान्हू, ननके, पिल्लू व पारस को हत्या व सामूहिक दुराचार का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
अर्थदंड अदा न करने पर आरोपियों को तीन-तीन वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। न्यायाधीश ने अर्थदंड की राशि में से तीन चौथाई धनराशि मुआवजे के रूप में वादी मुकदमा को देने तथा एक चौथाई धनराशि सरकारी खजाने में जमा करने का आदेश दिया है।