मैजापुर चीनी मिल में सोमवार की सुबह ट्रैक्टर ट्राली से गन्ना लादकर बेचने गया एक किसान चीनी मिल के गन्ना यार्ड में मंगलवार की सुबह अपनी ही ट्राली के नीचे मृत मिला। किसान की मौत से गुस्साए साथी किसानों ने मिल में जमकर हंगामा किया।
गुस्साए किसानों ने मिल कर्मियों को दौड़ा लिया। इस दौरान गन्ना तौल दोपहर तक बंद रही। दोपहर बाद जब मिल प्रबन्धन ने गन्ना तौल शुरु कराया तो किसान दोबारा हंगामा करने लगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसानों को समझाकर शांत कराया। मृतक किसान के बेटे की शादी भी 28 हो होनी थी। किसान के बेटे ने थाना कटरा बाजार में तहरीर दी है।
कोतवाली करनैलगंज क्षेत्र के चकरौत गांव के रहने वाले राहुल शुक्ल ने बताया कि उसके पिता विश्वनाथ शुक्ल (45) सोमवार की सुबह ट्रैक्टर ट्राली पर गन्ना लादकर मैजापुर चीनी मिल बेचने गए थे। राहुल के मुताबिक उसके पिता ने मिल में सोमवार की सुबह नौ बजे टोकन लिया और उसके बाद मिल के यार्ड पहुंचे थे।
राहुल ने बताया कि मंगलवार की सुबह तौल का नंबर आने पर मिल के गार्ड ने आवाज लगाई तो साथी किसान चिरौंजी व बृजेश ने उसके पिता की तलाश की तो वह अपनी ही ट्राली के नीचे मृत पड़े मिले। विश्वनाथ की मौत से गुस्साए किसान आक्रोशित हो गए और जमकर हंगामा किया। गुस्साए किसानों ने मिल कर्मियों को दौड़ा लिया।
हंगामे के कारण दोपहर तक गन्ना तौल बंद रही। दोपहर बाद जब मिल प्रबन्धन गन्ना तौल शुरु कराया तो किसान दोबारा हंगामा करने लगे। सूचना पर पहुंचे थाना कटरा बाजार के प्रभारी निरीक्षक ने किसानों को समझाकर शांत कराया।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। विश्वनाथ के बेटे राहुल शुक्ल ने थाना कटरा बाजार में तहरीर दी है। थाना कटरा बाजार के प्रभारी निरीक्षक प्रेमनाथ तिवारी ने बताया कि तहरीर मिली है, जांच की जा रही है। मैजापुर चीनी मिल के गन्ना अपर महा प्रबंधक पीके चतुर्वेदी ने बताया कि मिल यार्ड में ही किसान सोते हैं, किसी की ट्रैक्टर ट्राली आगे-पीछे होने में किसान की दबकर मौत हुई है, मंगलवार की सुबह उसका शव मिला है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
चकरौत गांव के गन्ना किसान विश्वनाथ शुक्ल की मौत से जहां उसके बेटे राहुल शुक्ल के सिर से पिता का साया उठा गया। वहीं पिता की मौत से उसकी शादी भी टल गई। राहुल ने बताया कि 28 फरवरी को उसकी शादी थी। पिता ने शादी के लिए बड़े अरमान संजोये थे। मगर उनकी मौत के साथ ही पिता के अरमान तो खत्म हुए ही उसके भी अरमान टूट गए।
मैजापुर चीनी मिल में किसानों के ठहरने के लिए रैन बसेरा तक नहीं बना है। यहां बन्ना बेचने आने वाले किसानों को दिन रात-ट्रैक्टर ट्राली के नीचे गुजारनी पड़ती है। यहां गन्ना लेकर आने वाले अधिकांश किसान ट्राली के नीचे ही सोते हैं। जिससे हादसे होते रहते हैं।