अपर निदेशक को भेजे गए पत्र में उन्होंने एक हफ्ते के भीतर मंडलीय प्रबंधक से जवाब लेकर इसकी रिपोर्ट उन्हें भेजे जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जवाब न मिलने की दशा में उनके खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई किए जाने को कहा है।
बता दें कि भारत सरकार की योजना एनआरएचएम, अब एनएचएम में 10 साल से 19 साल तक के बच्चों मे आयरन की कमी को दूर करने के लिए आयरन फोलिक एसिड व पेट में होने वाली कीड़ों को मारने के लिए एल्बेेंडाजाल नामक टेबलेट दी जाती है। जिसका वितरण स्वास्थ्य कार्यकर्ता हरेक स्कूलों में जाकर करते हैं।
इसकी हर हफ्ते मंडलीय प्रबंधक एनआरएचएम को समीक्षा कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजनी होती है। ताकि प्रदेश व देश स्तर पर होने वाली विफ्स (वीकली आयरन फोलिक एसिड सप्लीमेंशन) की समीक्षा बैठक में इसकी जिलेवार उपलिब्ध आंकी जा सके।
बीते दिनों लखनऊ में आयोजित विफ्स की समीक्षा बैठक में इसकी रिपोर्ट न मिलने से नाराज मिशन निदेशक अमित कुमार घोष ने मंडल में एनआरएचएम का काम देख रहे मंडलीय प्रबंधक अरविंद कुमार गोस्वामी से उनका जवाब मांगा है।
इसके लिए अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. उमाकांत वर्मा को पत्र भेज मिशन निदेशक ने मंडलीय प्रबंधक से जवाब तलब करते हुए इसकी रिपोर्ट उन्हें एक हफ्ते के भीतर भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जवाब न मिलने की दशा में उनकी चरित्र पंजिका में सेंसर एंट्री (प्रतिकूल प्रविष्टि) दिए जाने को कहा है।
आरोप है कि मंडलीय प्रबंधक जिले में चल रहे विफ्स कार्यक्रम पर ध्यान नहीं दे रहे। न ही उनकी ओर से जिले में संचालित विफ्स कार्यक्रमों को लेकर किसी तरह की कोई समीक्षा बैठक ही की जा रही है।
समीक्षा में ये 5 जिले भी फिसड्डी
विफ्स कार्यक्रम के संचालन और समीक्षा में लापरवाही बरतने के लिए केवल गोंडा जिले में तैनात मंडलीय प्रबंधक एनआरएचएम अरविंद कुमार गोस्वामी से ही जवाब नहीं मांगा गया है। बल्कि इसके अलावा कानपुर नगर, कन्नौज, लखीमपुर खीरी, जीबी नगर और चंदौली के भी मंडलीय प्रबंधकों से भी इसकी रिपोर्ट मुख्यालय न भेजने के सम्बंध में जवाब मांगा गया है।