वाबगंज के तुलसीपुर माझा गांव में लोहिया आवास के निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बडी़ का मामला सामने आया है। इस गांव में लोहिया आवास पाने वाले 23 लाभार्थियों ने अफसरों की मिलीभगत से बिना आवास का निर्माण कराये ही 72.45 लाख रुपये हड़प लिए।
शिकायत मिलने पर जब डीएम ने पांच सदस्यीय समिति का गठन कर इसकी जांच कराई तो मामले का खुलासा हुआ है। कमेटी ने इस मामले में गांव के सचिव को दोषी मानते हुए उसके निलंबन की संस्तुति जिलाधिकारी से की है।
नवाबगंज के तुलसीपुर माझा गांव में वित्तीय वर्ष 2014-15 में 199 लोगों को पात्र मानते हुए लोहिया आवास देने के लिए चयनित किया गया था। चयन के बाद सभी लाभार्थियों को पहली किश्त के तौर पर एक लाख 35 हजार 500 रुपये उनके बैंक खाते में भेज दी गई, लेकिन इनमें से कुछ लोगों ने आवास का निर्माण का काम ही नहीं प्रारंभ कराय
। जिम्मेदार अफसरों ने भी इसकी पड़ताल नहीं की। इसी बीच लाभार्थियों ने ग्राम पंचायत अधिकारी से मिलीभगत कर आवास की दूसरी किश्त भी जारी करा ली। इस मामले की शिकायत गांव की ही एक महिला खुशबू पत्नी राजेश ने जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन से की थी।
डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आशीष कुमार के नेतृत्व में एक पांच सदस्यीय कमेटी का गठन कर मामले की जांच के निर्देश दिए थे। अमर उजाला ने अपने एक फरवरी के अंक में लोहिया आवास आवंटन में 85 लाख का गोलमाल शीर्षक से लोहिया आवास आवंटन में घपले का खुलासा किया था।
मंगलवार को जांच टीम के सदस्य ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आशीष कुमार, अपर जिलाधिकारी चतुर्थ अमरेश कुमार व मनरेगा के श्रम उपायुक्त रोजगार अशोक कुमार मौर्य तुलसीपुर माझा गांव पहुंचे ओैर आवास आवंटन की जांच की।
तीनों अफसरों ने यहां बड़े पैमाने पर धांधली पकड़ी। जांच टीम ने पाया कि 23 लाभार्थियों ने आवास का निर्माण भी नहीं शुरु कराया है, लेकिन उन्हें आवास की दूसरी किश्त भी जारी कर दी गई।
श्रम उपायुक्त के अनुसार आवास का 50 प्रतिशत काम पूरा हो जाने के बाद ही दूसरी किश्त जारी करने का नियम है, लेकिन गांव पंचायत सचिव दिनेश कुमार ने आवासों का स्थलीय सत्यापन नहीं किया और अफसरों को गुमराह करके इन सभी लाभार्थियों को आवास की दूसरी किश्त का भुगतान करा दिया। इस मामले में लाभार्थियों ने ग्राम पंचायत अधिकारी की मिलीभगत से 72.45 लाख रुपये हड़प लिए।
आवासों के निर्माण के बाद रोशनी के लिए जो सोलर लाइट लगाई जानी थी उसे भी दूसरे लोगों को बेंच दिया गया। इसके अलावा वर्मी कंपोस्ट के निर्माण में भी गडबड़ी पकड़ी है। मनरेगा उपायुक्त अशोक कुमार मौर्य ने बताया कि गांव में पांच लोगों को वर्मी कंपोस्ट के गड्ढे के निर्माण के लिए 14 हजार रुपये आवंटित किए गए थे लेकिन किसी ने भी गड्ढे का निर्माण नहीं कराया और सरकारी धन का गबन कर लिया।
इनसेट
सड़क बनी नहीं निकल गए 3.83 लाख
लोहिया आवास के अलावा यहां मनरेगा योजना में भी जमकर धांधली की गई। मनरेगा उपायुक्त अशोक कुमार मौर्य ने बताया कि अभिलेखों में पक्की सड़क से रंगेश के घर तक मिट्टी पटाई का काम दिखाया गया था लेकिन जब मौके पर इसकी जांच की गई तो पता चला कि कार्यस्थल पर इस तरह का कोई काम नहीं हुआ है, जबकि इसके निर्माण के नाम पर 2 लाख 14 हजार 620 रुपये निकाल लिए गए। इसी तरह से पक्की सड़क से बेचू तिवारी के घर तक मिट्टी पटाई का कार्य दिखाया गया था लेकिन जांच में यह काम भी फर्जी पाया गया। इसके लिए भी एक लाख 68 हजार 74 रुपये निकालकर हड़प लिए गए।
इनसेट
बिना स्वीकृति के जानवर शेड के नाम पर 20 हजार का भुगतान
गोंडा। तुलसीपुर माझा गंाव में बिना तकनीकी स्वीकृति के गांव के रहने वाले राजू को जानवर शेड का आवंटन कर दिया गया। यह कार्य भी पूरा नहीं कराया गया जबकि इसके लिए 20 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसके लिए एमबी बुक व मस्टररोल भी नही जारी कराया गया।
वर्जन
तुलसीपुर माझा गांव में हुए घपले की पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौपी गई है। इस मामले में ग्राम पंचायत अधिकारी दिनेश कुमार को दोषी मानते हुए डीएम से उसके निलंबन व लाभाथयों से सरकारी धन के वसूली के लिए आरसी जारी करने की संस्तुति की गई है।
-आशीष कुमार, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट