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वायु प्रदूषण बढ़ा रहे सालों पुराने डीजल वाहन

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शहर से बाहर होंगे छह हजार डीजल वाहन
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गोंडा। शहर में डीजल चलित पुराने वाहन लोगों की सांसों में जहर घोल रहे हैं। यहां चलने वाले डीजल के वाहन 10 व 15 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। इसमें से रोडवेज की बसें तो 20 साल का समय पूरा कर चुकी हैं।

इन वाहनों से लोगों के स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण का बुरा असर पड़ रहा है। इन वाहनों से जहरीले धुआं सांस के साथ लोगों के शरीर में पहुंचकर उन्हें बीमारियां बांट रहे हैं। ऐसे वाहनों के संचालन पर सीएम के आदेश से लोगों को कुछ दिनों के लिए यात्रा में साधन के इंतजार में परेशानी जरूर होगी।
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मगर इनके बंद होने से उन्हें बीमारियों से बचाया जा सकेगा। शहर में हर रोज दस हजार से अधिक डीजल की गाड़ियां दौड़ रही हैं। इनमें छह हजार से अधिक वाहन दस साल व इससे भी अधिक पुराने हैं। देखरेख व चेकिंग के बाद भी इन वाहनों को आरटीओ महकमा रोक नहंी पा रहा है।

इनमें से अधिकांश वाहनों में से निकलने वाला धुआं हवा में घुल रहा है। इससे निकलने वाले धुआं से लोग श्वांस की बीमारी जेसे दमा आदि से पीड़ित हो रहे हैं। हालांकि इन वाहनों के बंद होने से लोगों को यात्रा करने में कुछ दिनों के लिए परेशानी तो झेलनी पड़ेगी।

दस साल पुराने डीजल वाहन
कुल डीजल वाहन- 3,107
प्राइवेट डीजल वाहन- 2000
रोडवेज बसें- 30
प्राइवेट बसें- 85
ट्रकें- 310
जीप/कार- 560
आटो/टैम्पो- 152

सांसों में जहर घोल रहे किस्टल, कार्बन मोनो आक्साइड

गोंडा। पुराने वाहनों से धुआं के साथ किस्टल, कार्बन मोनो आक्साइड जैसे गैस निकलती है। इससे बचने के लिए लोगों को मास्क लगाने की जरुरत होती है। मगर भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में लोग मास्क लगाकर नहीं चल पाते हैं। ऐसे में ये किस्टल व कार्बन मोनो आक्साइट लोगों की सांस में जहर घोल रहे हैं।

इनसेट
इन रुटों पर बसें कम, प्राईवेट वाहन हैं सहारा
-गोंडा-मनकापुर-मसकनवां-बभनान
-गोंडा-रगडग़ंज-तरबगंज
-गोंडा-रगडग़ंज-उमरीबेगमगंज
-गोंडा-कटरा बाजार-खरगूपुर
-गोंडा-परसपुर-करनैलगंज
-गोंडा-धानेपुर-बाबागंज-उतरौला

रोडवेज बसें बंद होने से 2 हजार लोगों को तलाशने होंगे साधन
गोंडा। परिवन निगम गोंडा में 10 साल से अधिक पुरानी तकरीबन 30 बसें रोजाना लोगों को उनके गन्तव्य तक पहुंचाती हैं। सीएम के आदेश के बाद इन बसों के बंद होने से हर रोज यहां से यात्रा करने वाले 2 हजार लोगों को अन्य साधन तलाशने होंगे। रोडवेज की पुरानी बसें बंद होने से इन यात्रियों को जोडने के लिए परिवहन निगम को 30 नई बसें चलानी होंगी। तभी यह यात्री अपने गन्तव्य तक पहुंच सकेंगे।
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-डीजल चालित 10 साल पुराने वाहनों के बंद होने का सरकार फैसला प्रदूषण नियंत्रण को लेकर है। इस फैसले से प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ ही नए वाहन अब सड़कों पर दिखाई पड़ेंगे। लोगों को यात्रा करने में सुविधा मिलेगी। वह अपने गन्तव्य तक समय से पहुंच सकेंगे।
डा. सर्वेश गौतम, एआरटीओ प्रर्वतन
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