फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बजाज ग्रुप की दो चीनी मिलों ने किसानों का फंसाया 1.6 अरब रुपये

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
बजाज की दो चीनी मिलों ने किसानों के 160 करोड़ दबाए

गोंडा। देवीपाटन मंडल के बजाज ग्रुप की दो चीनी मिलों ने गन्ना किसानों के 160 करोड़ रुपये दबा लिया है। इतना ही नही इन मिलों ने गन्ना किसानों के पिछले साल के खरीदे गन्ने का भी अभी तक भुगतान नही किया है।

गन्ने का पैसा न मिलने से किसानों के सभी जरूरी कार्य ठप पड़ गये हैं। वहीं दूसरी तरफ मिल के जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। तो गन्ना विभाग के अफसर चीनी मिल की ओर से चीनी बेचकर गन्ना मूल्य दिये जाने का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
विज्ञापन


मण्डल की बजाज ग्रुप की दोनों चीनी मिलों के पेराई शुरू किये एक माह का समय गुजर गया है लेकिन मिलों की ओर से अन्य मिलों के 100 प्रतिशत गन्ना मूल्य भुगतान किये जाने के सापेक्ष बजाज ग्रुप की दोनों चीनी मिलों ने मात्र 36 व 24 प्रतिशत का ही भुगतान किया गया है।

अभी तक मनमानी कर रही इन मिलों पर गन्ना विभाग व प्रशासन और प्रदेश शासन की ओर से कोई कार्रवाई नही की गई है। दोनंो चीनी मिलों का खरीदे गये गन्ने में अच्छा चीनी परता भी मिला है। गोंडा के बजाज कुंदुरखी चीनी मिल को 9.47 चीनी रिकवरी मिले हैं जिससे अब तक उसने 3.84 लाख क्विंटल चीनी प्रोडक्शन किया है वहीं बलरामपुर की बजाज इटईमैदा चीनी मिल को 9.20 प्रतिशत की चीनी रिकवरी के साथ 2.45 लाख क्विंटल चीनी का प्रोडक्शन किया है।

इसके बावजूद चीनी मिलों की ओर से नियमानुसार समय से किसानों के गाढ़ी कमाई का भुगतान नही किया जा रहा है। किसानों को पैसे की कमी से कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

बच्चों की फीस व दवा का नही है पैसा
गोंडा। ग्राम पंचायत तुर्काडीहा के किसान नरेन्द्र अंकम ओझा का कहना है कि बजाज कुन्दुरखी चीनी मिल को गन्ना बेचा था। अभी तक पैसा नही मिला है। उन्होंने बताया कि उनका पिछले साल का भी पैसा नही मिला है।

पैसा न मिलने से बच्चों की पढ़ाई का फीस व बीमार बेटी के इलाज में दिक्कत हो रही है। किसान का कहना है कि वह चाहते हैं कि उनका गन्ना दूसरी चीनी मिल को दिया जाए। नगदी फसल का जब समय से पैसा नही मिल रहा है तो इस चीनी मिल को गन्ना बेचने से कोई फायदा नही है।


दूसरी फसल व शादी का बजट नही
गोंडा। किसान पैसा न पाने से परेशान हैं। बजाज मिल क्षेत्र के ग्राम बौंरिहा के किसान अमर नाथ सिंह ने चार पर्ची गन्ना बेचा है।

मिल पर करीब एक लाख रुपये बकाया है। उनका कहना है कि घर में बेटे की शादी की तैयारी चल रही है गन्ने का पैसा भी नही मिल रहा है। किसान सत्य देव सिंह का कहना है कि 1.21 लाख रुपये से अधिक का गन्ना बेचा है एक भी पर्ची का पैसा नही मिलने से दूसरी फसलों की तैयारी के लिए लागत नही है। कोई अधिकारी किसानों की इस समस्या की ओर ध्यान नही दे रहा है।

केन एक्ट को ठेंगा दिखा रहे बजाज मिल के जिम्मेदार
गोंडा। गन्ना मल्य भुगतान व गन्ना खरीद विनियमन अधिनियम के तहत चीनी मिलों को खरीदे गये गन्ने का मूल्य गन्ना खरीद के 14 दिन के अन्दर भुगतान करने का नियम है। देवीपाटन मण्डल में बजाज ग्रुप की दो चीनी मिलें संचालित हैं।

गन्ना मूल्य भुगतान में बजाज ग्रुप की दोनों चीनी मिलों के अधिकारियों ने केन एक्ट को ठेंगा दिखा दिया है। पेराई सत्र में बजाज कुन्दुरखी चीनी मिल ने अभी तक नौ दिसम्बर व बजाज इटईमैदा की चीनी मिल ने 05 दिसम्बर तक ही भुगतान किया है। जबकि मंडल में बलरामपुर ग्रुप की आधा दर्जन चीनी मिलों की ओर से तय समय में 100 प्रतिशत गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा रहा है।

हालांकि बहराइच की चिलवरिया व नानपारा की सहकारी चीनी मिल की ओर से भी कम भुगतान किया जा रहा है। गन्ना मूल्य के कम भुगतान पर अभी तक गन्ना विभाग, जिला प्रशासन व प्रदेश शासन की ओर से अभी तक किसानों का पैसा फंसाने वाली चीनी मिलों पर कोई कार्रवाई नही की गई है। अधिकारी भी दोषी मिल अधिकारियों को अभयदान देकर काम चलाऊं रवैया अपनाए हुए हैं।

डिफाल्टर मिल को गन्ना सप्लाई से खड़े किये हाथ
गोंडा। गन्ना मूल्य भुगतान में फिसड्डी बजाज ग्रुप की चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करने से परसपुर ब्लाक के छह क्रय केंद्र के किसानों ने हाथ खड़ा कर दिया है। परसपुर अ,ब व पसका अ,ब व स क्रय केंद्र को हाल ही में शासन की ओर से हैदरगढ़ चीनी मिल से हटाकर गोंडा के बजाज चीनी मिल को दे दिया है।

इसके विरोध में क्षेत्र के किसान पिछले एक पखवारे से आंदोलनरत हैं। किसानों ने आयुक्त, जिलाधिकारी, उप गन्ना निदेशक के कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन देकर बलरामपुर ग्रुप को गन्ना देने की मांग कर चुके हैं। बेलवा गांव के किसान अनिल सिंह व परसपुर के किसान वीरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि समय से पैसा न देने की वजह से वह लोग बजाज चीनी मिल को गन्ने की सप्लाई नही करना चाहते हैं। मांगे न मानी गईं तो किसान सीएम से भी मिलेंगे।
विज्ञापन



बजाज की दोनों चीनी मिलें चीनी बेचकर गन्ना मूल्य का भुगतान कर रही हैं। जबकि अन्य चीनी मिलें अपने बैंक खाते से सीधे किसानों को समय से भुगतान कर रही हैं। चीनी बेचने में देरी से किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान में देरी हो रही है। चीनी मिल के अधिकारियों को जल्द भुगतान की चेतावनी दी गई है।
- अमर सिंह, उप गन्ना निदेशक देवीपाटन मण्डल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें