गोंडा। कोतवाली नगर क्षेत्र के सोनी हरलाल गांव के जोगियनपुरवा मजरे की एक महिला परिवार की प्रताड़ना और पुलिस के न सुनने से तंग आकर शनिवार की सुबह सोनी रेलवे क्रॉसिंग के समीप अपने सात माह के मासूम बेटे को साथ लेकर ट्रेन के आगे कूद गई। इस दर्दनाक हादसे में महिला की मौके पर ही मौत हो गई जबकि सात माह का उसका बेटा हादसे मे बाल बाल बच गया। शनिवार को हादसे के बाद पुलिस ने महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मासूम बच्चे को पुलिस ने इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया है जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
कोतवाली नगर क्षेत्र के सोनी हरलाल गांव के जोगियन पुरवा गांव के रहने वाले रामसेवक मौर्या की पत्नी गीता मौर्या पारिवारिक कलह से परेशान थी। उसने स्थानीय चौकी पर कई बार शिकायत की कि उसके पति व सास उसकी पिटाई करते हैं। वह रोज-रोज की प्रताड़ना से परेशान थी। पुलिस ने शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। यह बात उसने अपने पिता राम कुमार मौर्य को भी बताई थी। शनिवार की सुबह भी वह घर से गुस्से में पुलिस चौकी पर शिकायत के लिए निकली थी। बताया जा रहा है कि कई बार शिकायत पर सुनवाई न होने से उसका मन बदल गया और उसने जान देने का फैसला कर लिया। इसके बाद वह अपने सात माह के मासूम बेटे को साथ लेकर गोंडा-गोरखपुर रेलखंड पर सोनी रेलवे क्रॉसिंग के समीप पहुंची ही थी कि सामने से आ रही ट्रेन को देखकर वह अपने मासूम बेटे के संग ट्रेन के आगे कूद गई।
इस दर्दनाक हादसे मे महिला की तो मौके पर ही मौत हो गई लेकिन उसका सात माह का बेटा सत्या चमत्कारिक रूप से ट्रैक से अलग जा गिरा और उसकी जान बच गई। सूचना पर पहुंची कोतवाली नगर की पुलिस ने महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। जबकि उसके मासूम बेटे को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक महेंद्र कुमार ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है। मृतक महिला के खरगुपुर थाना क्षेत्र के असिधा गांव निवासी राम कुमार मौर्य ने घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि परिवार की प्रताड़ना से बेटी अवसाद में थी। पुलिस की अनदेखी से उसने जान देने का निर्णय ले लिया। उन्होंने मामले में कार्रवाई कराने की मांग किया है।
अब कर रहे महिला सुरक्षा का दावा
प्रताड़ना से तंग महिला की मौत के बाद हर कोई उसे सुरक्षा देने का दावा करता दिखा। गांव के प्रधान विनय शंकर तिवारी पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि काश, गीता ने अपनी समस्या मुझसे बताई होती। अगर मुझसे बताती तो वह विवाद निपटा देते। अब क्या करें, घटना दुखद है। इसी तरह चौकी प्रभारी भुनेश्वर यादव के भी सुर बदले नजर आए। उन्होंने भी कहा कि महिला को लिखित शिकायत करनी चाहिए थी और पूरी बात बताना चाहिए था, मैं पूरी मदद करता। उन्होंने शिकायत करने की बात से इन्कार किया, कह ाकि उन्हें प्रकरण की जानकारी नहीं थी।
अब मां के आंचल की छांव के लिए तड़प रहा मासूम
सात माह के मासूम कृष्णा के सिर से मां के ममता का आंचल अब नही रहा। दुनियादारी से बेखबर मासूम हादसे के बाद से सहस्त्रत्त्मा-सहमा नजर आ रहा था। अजीब सा डर का भाव उसके चेहरे पर दिख रहा था। हाथ ऐसे मचल रहे थे कि जैसे वह मां के आंचल को खोज रहा हो। मासूम को तो इस बात का आभास नही था कि अब उसे दुलराने वाली मां इस दुनिया में नही रही। परिवार के लोग बच्चों को दुलरा रहे थे लेकिन उसकी आंखे जहां मां को खोज रही थी, वहीं वह मां की गोद महसूस न होने से रोए जा रहा था।
चौकी व थानों पर नहीं दी जाती है शिकायतों की प्राप्ति
थानों और चौकियों पर प्रभारी हैं, दिवान हैं। लेकिन वे थानों और चौकियों का संचालन अपने हिसाब से चलाते हैं। जिलाधिकारी से लेकर हर अधिकारी के यहां शिकायतों की प्राप्ति मिलती है। पता नहीं क्या है कि थानों और चौकियों पर प्रार्थना देने के बाद उसकी कोई प्राप्ति नही मिलती है। सिर्फ कोई खोने की सूचना दे तो दीवान की ओर से मुहर लगाकर प्राप्ति दी जाती है। लेकिन शिकायतें हाथों हाथ ही ली जाती है और हल्का दरोगा या सिपाही को दी जाती है। इससे कोई साबित ही नही कर सकता है कि शिकायत पहले किया था।