पालना गृह योजना घोटाले में सीबीआई ने जांच कर्ताओं की मांगी डिटेल
गोंडा। सचल पालना गृह योजना घोटाले के मामले की जांच कर रही सीबीआई ने योजनाओं के संचालन के समय जांच करने वाले जांचकर्ताओं की डिटेल तलब की है। पांच साल पहले संचालित सचल पालना गृह योजना में समाज कल्याण बोर्ड व स्वयं सेवी संस्थाओं ने बड़ा घोटाला किया था।
इस मामले की जांच में एक बार फिर से तेजी आने से घपले में शामिल स्वयं सेवी संस्थाओं खलबली मच गई है। अब धीरे धीरे बोर्ड के इस खेल में शामिल अधिकारियों व एनजीओ पर शिकंजा कसेगा।
वर्ष 2012-13 के दौरान प्रदेश भर में भारत सरकार व प्रदेश सरकार के सहयोग से समाज कल्याण बोर्ड के जरिये श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों की देखभाल के लिए सचल पालना गृह योजना शुरू की गई थी।
जिले में भी श्रम विभाग के पंजीकृत बच्चों की देखभाल के लिए समाज कल्याण बोर्ड की ओर से करीब आठ एनजीओ की ओर से 25 सचल पालना गृह के नाम से केंद्र खोले गये थे। इसमें योजना के नाम काम तो सिर्फ दिखावे का करके जिम्मेदारों ने सरकार की ओर से मिले बड़े बजट को डकार गये।
इस मामले की शिकायत हुई तो शासन ने पहले इसकी जांच महिला एंव बाल कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को सौंपी। जांच में जब कई जिले में इस खेल का पता चला तो सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपी थी।
बताया जाता है कि कमीशन खोरी में समाज कल्याण के अधिकारियों ने आंख मूंद कर ऐसे एनजीओ को काम सौंपे जिसने जिले में वास्तव में कोई काम किया ही नही। अनाज व मनरेगा घोटाले के बाद यह तीसरा बड़ा घोटाला है जिसकी सीबीआई जांच कर रही है।
जांच कर रही सीबीआई टीम ने अब जिले में एनजीओ की ओर से खोले गये पालना गृह के नाम खोले गये सेंटरों का भौतिक सत्यापन करने वालों की डिटेल जुटाना शुरू किया है। सीबीआई ने जिले के श्रम विभाग कार्यालय से जांचकर्ता के नाम पते व मोबाइल नम्बर आदि मांगे हैं। ताकि उनका भी बयान दर्ज किया जा सके।
जिले में पालना गृह योजना के संचालन के समय में श्रम वर्तन अधिकारी रहे जेपी शुक्ला ने जांच की थी उन्होंने जांच रिपोर्ट श्रम विभाग के मुख्यालय को भेजी थी। फिलहाल अब वह सेवानिवृत हो चुके हैं। विभाग ने उनकी डिटेल श्रम सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड को भेज दी है।
आठ एनजीओ ने 25 सेंटर खोलने के नाम किया था घपला
गोंडा। जिले में आठ एनजीओ को सचल पालना गृह योजना का काम दिया गया था। जिले के एक पूर्व जिला प्रोबेशन अधिकारी का कहना है कि जिले में करीब 25 सेंटर खोले गये थे। इस योजना का संचालन समाज कल्याण बोर्ड लखनऊ व दिल्ली के सहयोग से शुरू की गई थी।
बोर्ड की ओर से योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों की देखभाल करने की जिम्मेदारी स्वंय सेवी संस्थाओं को दी गई थी। सूत्रों का कहना है कि इस योजना में सिर्फ सेंटर खुले काम कुछ नही हुआ। सरकार की ओर से जारी किये गये बजट का बन्दरबांट हुआ। काम करने वाले स्वंय सेवी संस्थाओं के जिम्मेदारों पर सीबीआई का शिकंजा कसेगा।
पांच छह साल पहले श्रम विभाग के पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों की देखभाल के लिए सरकार की ओर से सचल पालना गृह योजना की शुरूआत की गई थी। इस का काम को कराने की जिम्मेदारी समाज कल्यार्ण बोर्ड को दिया गया था बोर्ड ने सेंटर खोलने के लिए कई स्वंय सेवी संस्थाओं को काम दिया था।
इसकी जांच श्रम विभाग के अधिकारियों ने की थी। जांच में क्या स्थिति थी इसकी जानकारी के लिए सीबीआई टीम ने विभाग के जांचकर्ताओं की डिटेल मांगी है। जांचकर्ता अधिकारियों की डिटेल श्रम विभाग सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड उत्तर प्रदेश शासन को भेजी जा रही है।
- शमीम अख्तर अंसारी, उप श्रमायुक्त