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15 टैक्सबुल वस्तुओं के परिवहन-भण्डारण पर अब ई वे बिल-2 का पहरा

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15 वस्तुओं के परिवहन-भण्डारण पर अब ईवे बिल-2 का पहरा

गोंडा। शासन ने जीएसटी के तहत 15 और वस्तुओं पर ई वे बिल-2 का पहरा बिठा दिया है। अब सिगरेट, तम्बाकू, तारकोल, टायर, टिम्बर, मार्वल व टाइल्स जैसे 15 कीमती वस्तुओं पर जीएसटी का शिकंजा कस दिया है।

ऐसे इन सभी वस्तुओं को किसी भी कारोबारी/फर्म के प्रदेश के अन्दर या फिर प्रदेश के बाहर परिवहन व भण्डारण करने पर शासन की ओर से निर्धारित प्रपत्र ई वे बिल-2 को जनरेट करना होगा। ऐसा न करने वाली फर्मो व कारोबारियों पर वाणिज्य कर विभाग जांच कर उनसे टैक्स जमा कराने के साथ जुर्माने की कार्रवाई से दण्डित करेगा।
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पहले यह नियम केवल मेंथा आयल, लोहा, खाद्य तेल व सुपाड़ी पर ही लागू था। शासन 15 और कीमती वस्तुओं से कर अर्जन सुनिश्चत करने के लिए पुराने नियमों में बड़ा संशोधन किया है। शासन का यह नया संशोधन बिल प्रदेश भर में 16 दिसम्बर 2017 से प्रभावी होगा।

उत्तर प्रदेश शासन के संस्थागत वित्त एंव निबन्धन अनुभाग के अपर मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने नये नियमों का आदेश वाणिज्य विभाग के सभी अधिकारियों को जारी कर दिया है। उन्होंने गुड्स एंव सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक्ट में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दिया है।

जो प्रदेश भर में इसी माह में 16 दिसम्बर से प्रभावी हो जाएगा। इससे अब उत्तर प्रदेश के भीतर या राज्य के भीतर किसी भी स्थान से राज्य के बाहर किसी स्थान तक 50 हजार रुपये तक या अधिक के कर योग्य माल (वस्तु) को भेजने या भण्डारण करने या फिर इसे प्रदेश के बाहर के प्रान्त में भेजने पर ई वे बिल-2 की आवश्यकता होगी। जांच में इस प्रपत्र के अभाव में विभाग कर व जुर्म ाने की वसूली की कार्रवाई करेगा।

पहले केवल इन वस्तुओं पर लागू था ये नियम
1- मेंथा आयल , 2- लोहा ।
3- खाद्य तेल , 4- सुपारी ।
इनसेट
अब इन 15 वस्तुओं पर कसा ई वे बिल-2 का शिकंजा
* तारकोल/चारकोल/कोलतार, * सभी पेय कोला/कोक, * सभी प्रकार के टाइल्स/मिट्टी निर्मित छत, * अखबारी समेत सभी कागज, * मार्वल/स्टोन, * सिगरेट/सिगार, * पान मसाला/गुटखा, * खैनी,जर्दा,सुर्ती अन्य तम्बाकू, * सभी प्रकार के लुब्रीकेण्ट, * टायर/ट्यूब, * कत्था, स्किम्डमिल्क पाउडर, * पेण्ट/वार्निश, * सेनेटरी वेयर फिटिंग, * वुड टिम्बर, * बिटुमिन ।

जानिए क्या है ई वे बिल-2
गोंडा। ई वे बिल-2 वह प्रपत्र है जिसे किसी वस्तु के उस कारोबारी की ओर से जनरेट किया जाएगा जिसकी वह आपूत कर रहा है। यह प्रपत्र प्रान्त के अन्दर माल बेचने व प्रान्त के अन्दर माल भेजने,माल को किसी दूसरे प्रान्त को भेजने व भण्डारित करने वाले को रखना होगा।

यह प्रपत्र माल की आपूर्ति करने वाले कारोबारी की ओर से शासन के वेबसाइट से अपलोड कर जनरेट किया जाएगा। ई वे बिल-2 को अपलोड करने से यह पता चलेगा किस कारोबारी/फर्म ने किसे कितना माल बेच भेजा है। इसके आधार पर ही विभाग उसपर टैक्स का निर्धारण करेगा। यही टैक्स सरकार को राजस्व के रूप में मिलेगा।
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पहले इस दायरे में केवल चार वस्तुएं थी लेकिन शासन ने नियमों में संशोधन कर इसमें 15 नये कीमती वस्तुओं को भी जांच के दायरे में ले लिया है। इन वस्तुओं के परिवहन करने व भंडारण करने वाले फर्मों को शासन की वेबसाइट से ई वे बिल-2 को जनरेट कर अपने साथ रखना होगा। ऐसा न करने वाली फर्मों के जांच में माल पकड़े जाने पर टैक्स जमा कराने के साथ जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। यह नियम 16 दिसम्बर से प्रभावी हो जाएगा।
- संतोष कुमार सिंह, असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्यकर
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