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बिहार के रहने वाले व्यक्ति को दे दिया प्रधानमंत्री आवास

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बिहार के रहने वाले व्यक्ति को दे दिया प्रधानमंत्री आवास
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बीडीओ की जांच में 29 अपात्रों को आवास दिए जाने का खुलासा
कल्यानपुर के ग्राम प्रधान व सचिव के खिलाफ एफआईआर के आदेश

गोंडा। प्रधानमंत्री आवास में अपात्रों व मृतकों को आवास का लाभार्थी बनाए जाने के बाद अब नवाबगंज के कल्याणपुर गांव में ग्राम प्रधान व सचिव की मिलीभगत से बिहार प्रांत के रहने वाले एक व्यक्ति को आवास आवंटन कर दिया गया।

बीडीओ की जांच में इसका खुलासा हुआ है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 48 लाभार्थियों में से 29 लाभार्थी अपात्र पाए गए हैं। इतना ही नहीं 7 अपात्र लाभार्थियों के खाते में आवास की प्रथम किश्त की धनराशि भी भेज दी गई।
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इस खुलासे के बाद सभी लाभार्थियों के खाते से धनराशि की निकासी पर रोक लगा दी गई है। इस मामले में सीडीओ ने ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।

नवाबगंज के कल्यानपुर ग्राम पंचायत में वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास के लिए 49 लोगों को पात्र बताकर चयनित किया गया था। ग्राम पंचायत सचिव ने इसमें से 48 लाभार्थियों को आवास का लाभ देने के लिए उनका रजिस्ट्रेशन कराया था।

रजिस्ट्रेशन के बाद इनमें से 18 लाभार्थियों के बैंक खाते में आवास निर्माण की प्रथम किश्त के रुप में 40-40 हजार रुपये की धनराशि भी भेज जा चुकी है। इसके अलावा 29 लाभार्थियों को आवास का स्वीकृति पत्र जारी हो चुका है।

शिकायत मिलने पर जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक ने 17 अगस्त को नवाबगंज के खंड विकास अधिकारी एसपी सिंह को आवास योजना में चयनित किए गए लाभार्थियों की पात्रता जांच करने के निर्देश दिए थे।

परियोजना निदेशक के निर्देश पर 18 अगस्त को बीडीओ के नेतृत्व में ग्राम पंचायत अधिकारी उज्जवल यादव, शेषमणि पटेल, अनिल कुमार गौतम,श्यामजी पांडेय,पियूष सिंह व तकनीकी सहायक प्रमोद कुमार तिवारी समेत सात सदस्यीय जांच टीम ने कल्यानपुर गांव जाकर सभी चयनित लाभार्थियों का सत्यापन किया।

इस सत्यापन के दौरान एक लाभार्थी हसमत अली बिहार का रहने वाला पाया गया। हसमत गांव के बगल सिथत एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता है।ग्राम प्रधान व सचिव ने मिलीभगत कर उसे आवास का लाभार्थी बना दिया।

आवास देने के लिए अभिलेखों में हेराफेरी कर उसे न सिर्फ गांव का निवासी दर्शाया गया बल्कि उसके मतदाता परिचय पत्र में ीाी छेड़छाड़ की गई। इस खुलासे के बाद जांच करने वाले अफसर भी अवाक रह गए।

इसके अलावा कुल 48 लाभार्थियों में से 29 लाभार्थी अपात्र पाये गए। इनमें से सात लाभार्थियों के खाते में आवास की प्रथम किश्त की धनराशि भी भेजी जा चुकी है। जांच टीम ने पाया कि यह पूरा खेल ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिव की मिलीभगत से रचा गया।

बीडीओ ने ग्राम प्रधान व सचिव के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी। बीडीओ की रिपोर्ट पर बुधवार को मुख्य विकास अधिकारी दिव्या मित्तल ने ग्राम प्रधान व सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।साथ ही सभी लाभार्थियों के खाते से धनराशि की निकासी पर रोक लगा दी गई है।

रामतेज, पुद्दनलाल, नंदलाल, पुद्दन, नैका, मुन्नीलाल, प्रेमा देवी, किशोरी, श्यामा, सुधरा देवी, राजेश, रामप्रसाद, हीरालाल, मोतीलाल, साम, बदलू, हरीराम यादव, हनुमान यादव, रामधीरज, राजाराम, धनलाल, कयूम, निजाम, पीर मोहम्मद, कसीदुन, कांती, मीरा, श्यामा व हसमत अली ।

गोंडा। गोंडा गिर्द ग्राम पंचायत में आवास जांच की फर्जी सत्यापन रिपोर्ट भेजने के मामले में झंझरी के एडीओ आईएसबी फंस गए हैं। परियोजना निदेशक ने उनके निलंबन की संस्तुति विभाग के अफसरों को भेजी है।
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परियोजना निदेशक वीरपाल ने बताया कि गोंडा गिर्द की रहने वाली रजनी पत्नी सीताराम का दो मंजिला मकान बना हुआ है। उनकी खुद की जांच में रजनी को अपात्र पाया गया था। इसके बावजूद एडीओ आईएसबी ने उसे आवास के लिए पात्र मानते हुए उसकी फर्जी सत्यापन रिपोर्ट भेज दी।
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