मुर्गी और बकरी के झांसे में नहीं आ रहा तेंदुआ
गोंडा। बुधवार को नवाबगंज के हरिहरपुर गांव में 6 लोगों पर हमला करने वाले तेंदुए की कोई लोकेशन अभी तक वन विभाग नहीं ट्रेस कर पाया है। जबकि तेंदुए को ट्रैंकुलाइज करने के लिए कानपुर व लखनऊ से बुलाई टीम भी खाली हाथ है।
वन विभाग पिछले 48 घंटों से तेंदुए को पकड़ने के लिए अंधेरे में तीर चला रहा है। कभी पिंजरे में मुर्गी बांधी जा रही है तो कभी बकरी। जबकि तेंदुआ है कि उसके हाथ ही नहीं लग रहा।
नवाबगंज के हरिहरपुर, चाईंपुरवा सहित क्षेत्र के करीब एक दर्जन से ऊपर गांवों में तेंदुए की पिछले तीन दिनों से दहशत फैली है। हालत यह है कि लोगों को अपने गांव में रतजगा करना पड़ रहा है।
तेंदुए के डर से लोग न तो गेहूं की कटाई करने जा पा रहे हैं, न ही खेत का अन्य कोई काम। ऊपर से जिस टमाटर व परवल के खेतों से निकलकर बीते बुधवार को तेंदुए ने 6 लोगों पर हमला किया था, वहां भी जाने से ग्रामीण डर रहे हैं।
इस वजह से उनके लाखों के टमाटर, परवल व अन्य सब्जियां बेकार हो रही हैं। कहने के लिए तो वन विभाग के लोग बीते बुधवार से ही तेंदुए को पकड़ने के लिए मौके पर डटे हैं। लेकिन इस काम में उन्हें अब तक कोई सफलता नहीं मिल पाई है।
गुरुवार को एक हाथी भी तेंदुए की कांबिंग के लिए मंगाया गया था। जो दोपहर बाद ही चला गया। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के लोगों की लापरवाही से उनके खेतों में खड़ी फसल को वह मारे डर के काटने नहीं जा पा रहे।
तेंदुआ कब किस पर हमला कर दे और जान चली जाए। नहीं कहा जा सकता। उधर गुरुवार की शाम लखनऊ व कानपुर से तेंदुए को ट्रैंकुलाइज (बेहोश) करने आई टीम भी अभी तक खाली हाथ है।
बतौर डीएफओ शुक्रवार की सुबह 25 से 30 वनकर्मियों की टीम के साथ उन्होंने हरिहरपुर व उसके आसपास गांव में कांबिंग की थी। लेकिन कहीं भी तेंदुए का कोई सुराग नहीं मिला। इसलिए वह कहां है, यह तो तभी पता चलेगा, जब उसकी कहीं से कोई लोकेशन मिलेगी। बहरहाल उनकी टीमें अपना काम कर रही हैं।
एक दिन में 100 किलोमीटर की दूरी तय करता तेंदुआ
वाइल्ड लाइफ के जानकारों की माने तो तेंदुआ जैसा जानवर एक दिन में कम से कम 100 किलोमीटर की दूरी तय करता है। ऐसे में अगर पिछले दो दिनों से उसकी कोई लोकेशन हरिहरपुर व आसपास के गांवों में नहीं मिली है तो माना जा सकता है कि वह नवाबगंज से दूर जा चुका है। अनुमान तो यहां तक लगाया जा रहा है कि वह घाघरा के जिस रास्ते से कतर्निया के जंगल से होता हुआ गोंडा पहुंचा, उसी रास्ते से वापस भी चला गया होगा।
हो सकता है मांस की गंध से पिंजरे तक आ जाए तेंदुआ
दो दिन पहले तेंदुए को पकडने के लिए नवाबगंज के हरिहरपुर गांव में वन विभाग ने पिंजड़ा रखवाया। जिसमें पहले दिन मुर्गी रखी गई। लेकिन जब तेंदुआ पिंजड़े तक नहीं आया तो उसे पकड़ने के लिए दूसरे दिन पिंजड़े में बकरी बांधी गई।
जबकि शुक्रवार को पिंजड़े से बकरी को हटाकर वन विभाग ने तीसरा प्रयोग कटा हुआ मांस बांधकर किया है। वन विभाग के लोग बताते हैं कि अगर तेंदुआ आसपास के इलाके में है तो मांस की गंध दो से तीन दिन में जब फैलनी शुरू होगी तो उसे सूंघकर यहां जरूर आएगा।
लखनऊ व कानपुर से तेंदुए को ट्रैंकुलाइज करने के लिए आई टीम के साथ उन्होंने खुद शुक्रवार को कांबिंग की थी। लेकिन उसकी कहीं कोई लोकेशन नहीं मिली। ट्रैंकुलाइजर टीम अभी देररात तक मौके पर रहेगी।
जबकि वन विभाग की दो अलग-अलग टुकडिय़ां पहले से क्षेत्र में लगी हैं। ग्रामीणों का पूरा सहयोग उन्हें मिल रहा है। लेकिन जहां तक उनका मानना है तेंदुआ नवाबगंज की टेरिट्री से बाहर जा चुका है। नहीं तो दो दिन में उसकी कहीं न कहीं कोई लोकेशन मिलती जरूर। बहरहाल उसे पकडने का पूरा प्रयास उनकी टीमें कर रही हैं।
-टी.रंगाराजू, डीएफओ गोंडा