गोंडा। नर्सिंग सहायक अंकित हत्याकांड में मंगलवार सुबह स्टेट मेडिको लीगल टीम ने रेल ट्रैक पहुंचकर क्राइम सीन दोहराया। टीम ने एक से दूसरे ट्रैक की दूरी मापी। गवाहों के बयान, सीडीआर व सीसीटीवी फुटेज का सत्यापन करके रेल ट्रैक तक अंकित कैसे पहुंचा ऐसे कई सवालों के जवाब विशेषज्ञों ने तलाशने की कोशिश की।
बता दें कि मोतीगंज थाना क्षेत्र के अचलपुर निवासी अनिल तिवारी के बेटे नर्सिंग सहायक अंकित हाॅस्पिटल से निकलकर राधाकुंड, आवास विकास, न्यू इंदिरा कॉलोनी के रास्ते सतई पुरवा तक पहुंचा था। इसके बाद उसका शव रेलवे ट्रैक पर पड़ा मिला था। अंकित के चाचा सुनील तिवारी ने नारायण हास्पिटल एंड कैंसर रिसर्च सेंटर के डाॅक्टर दीपक सिंह समेत अन्य के खिलाफ जीआरपी कोतवाली में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की तफ्तीश कोतवाली नगर पुलिस को ट्रांसफर होने के बाद नए सिरे से तफ्तीश शुरू हुई।
एसपी विनीत जायसवाल ने हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए स्टेट मेडिको लीगल टीम से मदद मांगी थी। मंगलवार सुबह स्टेट मेडिकोलीगल टीम फोरेंसिक के निदेशक गयासुद्दीन खान की अगुवाई में दो सदस्यीय टीम गोंडा पहुंची। टीम ने कोतवाली नगर व जीआरपी के संग ट्रैक पर पहुंचकर क्राइम सीन दोहराया।
टीम ने एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक की दूरी मापी और अंकित रेल ट्रैक तक कैसे पहुंचा, क्या ट्रेन से टकराने से उसकी जान गई या उसे मारकर ट्रैक पर डाला गया। विशेषज्ञों की टीम ने गवाहों के बयान, अंकित व डाॅक्टर दीपक सिंह के सीडीआर व सीसीटीवी फुटेज सत्यापन के लिए अपने साथ ले गई है। इस दौरान कोतवाल नगर राजेश सिंह व जीआरपी भी मौके पर मौजूद रही।
हरखापुर में भी हुआ था सीन रीक्रियेट, आज तक खुलासा नहीं
कोतवाली देहात क्षेत्र के हरखापुर निवासी चंद्रकांत दूबे 11 अप्रैल को पास के खेत में थ्रेसर चला रहे अपने भाई चंद्रमोहन दूबे को डीजल देने खेत गया था। वहां से लौटते समय रास्ते में लौव्वा टेपरा गांव के पास हमलावरों ने चंद्रकांत को घेरकर पिटाई करने के बाद गोली मार दी थी। 13 अप्रैल को अस्पताल में चंद्रकांत ने दम तोड़ दिया था। चंद्रमोहन दूबे ने माधवपुर गांव निवासी कृष्ण प्रसाद उर्फ नगोड़े तथा हरखापुर गांव के वीरेंद्र, अजय व राजू समेत नौ लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तफ्तीश के दौरान पुलिस हत्याकांड में किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी। देहात पुलिस की रिपोर्ट पर तत्कालीन एसपी आकाश तोमर के बुलाने पर स्टेट फोरेंसिक लैब लखनऊ से मामले में जांच की अपेक्षा की थी। इसके बाद 22 जून 2023 को लखनऊ लैब के विशेषज्ञ डॉ. एके श्रीवास्तव व एमके यादव ने टीम के साथ हरखापुर पहुंचकर क्राइम सीन रीक्रिएट किया था। मगर नौ माह बाद भी हत्याकांड का खुलासा नहीं हो सका है।