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खून के कारोबार में डी.फार्मा का छात्र गिरफ्तार

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22द्दस्रड्डश्च4-गोंडा के जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक। - फोटो : GONDA
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गोंडा। जिला अस्पताल में खून का कारोबार थम नहीं रहा है। बुधवार को जिला अस्पताल में अपरेंटिस कर रहे डी फार्मा के छात्र आशीष जायसवाल को खून का काला कारोबार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
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जिला अस्पताल में खून का काला कारोबार का मामला एक बार फिर सामने आया है। बुधवार को जिला अस्पताल ब्लड बैंक के पैथोलॉजिस्ट डॉ. चेतन पाराशर की तहरीर पर जिला अस्पताल में अपरेंटिस करने वाले डी फार्मा के छात्र आशीष जायसवाल को पुलिस टीम ने गिरफ्तार किया। कोतवाली में दी तहरीर में बताया गया कि आशीष जायसवाल खून के कारोबार में संलिप्त हैं, जो लोगों को बिना रक्तदान किए पैसे लेकर खून दिलवाने का ठेका लेता है। आशीष बुधवार को ब्लड बैंक गया। एक अन्य व्यक्ति भी साथ में था।
ब्लड बैंक कर्मचारियों को संदेह होने पर पूछताछ करने पर पता चला कि आशीष को नाम से नहीं जानता है। खून के लिए कुछ दिनों से संपर्क में है, इसने बिना रक्तदान किए खून दिलवाने का वादा किया है। खून का काला कारोबार का संदेह होने पर ब्लड बैंक मेडिकल अधिकारी डॉ. चेतन पाराशर ने तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की। प्रभारी निरीक्षक आलोक कुमार राव ने बताया कि मामले में तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
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पहले भी सामने आ चुके खून खरीद-फरोख्त के मामले
- जिले में खून के खरीद फरोख्त का मामला कोई नया नहीं है। पहले भी ब्लड बैंककर्मी की मिली भगत से खून के दलाली के कई मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि कोई मामला सामने आता है तभी प्रशासन की सक्रियता दिखती है। एक मार्च को खून के दलाली का मामला सामने आया था। औषधि विभाग की टीम ने एक निजी अस्पताल में पुलिस टीम के साथ छापा मारकर पैसे लेकर मरीजों को खून बेचने के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी की मिलीभगत व एक समाजसेवी संस्था का नाम सामने आया था। औषधि निरीक्षक की तहरीर पर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी राजकुमार चौधरी समेत 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन शांत हो गया। वहीं 15 जनवरी को जिला अस्पताल में शव वाहन चालक ने एक मरीज के तीमारदार से खून दिलाने के नाम पर सात हजार की रुपये की वसूली की थी। तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक ने संबंधित कर्मी व तीमारदार को आमने-सामने करके उन्होंने वसूले गए सात हजार रुपये वापस कराए थे। शव वाहन चालक की संविदा समाप्त कर दिया गया था। इन मामलों के पहले भी ब्लड बैंक में खून के नाम पर खेल पकड़ा जा चुका है। तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन के आदेश पर की गई छापामारी में 12 यूनिट खून कम मिला था। मामले में उस वक्त मुकदमा किया गया था। बाद में मामले को दबा दिया गया।
बुधवार को जिला अस्पताल में अपरेंटिस कर चुके डी फार्मा के छात्र आशीष कुमार ब्लड बैंक में खून लेने के लिए सदर विधायक प्रतीक भूषण से फोन करा रहे थे, जबकि पता करने पर पाया गया कि उसके किसी परिवार को खून की जरुरत नहीं है जिस पर सदर विधायक की शिकायत पर युवक की गिरफ्तारी की गई है। - डॉ. घनश्याम सिंह, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल
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