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डिप्टी कमिश्नर मनरेगा समेत सात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज

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धानेपुर (गोंडा)। मुजेहना ब्लाक के बेसहूपुर गांव में मनरेगा योजना के तहत किए गए 38 लाख रुपये के फर्जी भुगतान मामले में आखिरकार डिप्टी कमिश्नर मनरेगा फंस गए। डीएम के आदेश पर बुधवार को खंड विकास अधिकारी ने जिले के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर हरिश्चंद्र राम प्रजापति समेत सात लोगों के के खिलाफ मोतीगंज थाने में धोखाधड़ी व गबन का मुकदमा दर्ज करा दिया है। हरिश्चंद्र राम प्रजापति वर्तमान में मऊ जिले में डिप्टी कमिश्नर मनरेगा के पद पर तैनात हैं। डिप्टी कमिश्नर के अलावा गांव के तत्कालीन ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, एपीओ, लेखाकार, तकनीकी सहायक व रोजगार सेवक का नाम शामिल है। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद सभी पर सरकारी धनराशि की रिकवरी के साथ ही विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
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मुजेहना ब्लाक के बेसहूपुर गांव के रहने वाले देनी प्रसीद चौबे ने गांव में कराए गए विकास कार्यों में सरकारी धन का बंदरबांट किए जाने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत लोकायुक्त से की थी। लोकायुक्त ने मामले का संज्ञान लेते हुए डीएम को नोटिस जारी किया था और रिपोर्ट तलब की थी। लोकायुक्त के एक्शन के बाद डीएम ने तीन सदस्यीय समिति का गठन कर इस प्रकरण की जांच कराई तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। डीएम के तीन सदस्यीय टीम की जांच में करीब 37.74 लाख रुपये का फर्जी भुगतान का खुलासा हुआ। जांच टीम ने पाया कि मनरेगा योजना से आधे-अधूरे काम कराकर पूरा भुगतान निकाल लिया गया।
भुगतान में जिले के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर मनरेगा व मुजेहना का अतिरिक्त प्रभार देख रहे हरिश्चंद्र राम प्रजापति, ग्राम प्रधान सुरजीत चौबे, पंचायत सचिव अमरजीत, लेखाकार नंदश्याम, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा उमेश वर्मा, तकनीकी सहायक राकेश वर्मा व रोजगार सेवक राधेश्याम की संलिप्तता उजागर हुई थी। रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए मुजेहना बीडीओ को सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने, सरकारी धनराशि की रिकवरी व विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देश के बाद एफआईआर रोकने के लिये डिप्टी कमिश्नर लगातार पैरवी में जुटे थे, लेकिन आखिरकार पैरवी फेल हो गई और बुधवार को बीडीओ मुजेहना की तहरीर पर मोतीगंज थाने में सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई।
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पंचायत सचिव का हो चुका है निलंबन
धानेपुर। बेसहूपुर गांव में मनरेगा योजना में हुए फर्जी भुगतान के मामले में गांव के पंचायत सचिव के खिलाफ एक दिन पहले ही निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। डीपीआरओ सभाजीत पांडेय ने बताया कि डीएम के आदेश पर पंचायत सचिव अमरजीत को निलंबित किया गया है और उसे मुजेहना से हटाकर पंडरीकृपाल ब्लाक से संबद्ध कर दिया गया है। विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है।
78 हजार के घपले में तकनीकी सहायक को भेजा जेल
रगड़गंज (गोंडा)। बेलसर ब्लाक के मरगूबपुर में मनरेगा के तहत बिना कार्य कराए ही भुगतान करने के मामले में उमरी बेगमगंज पुलिस ने तकनीकी सहायक को गिरफ्तार कर जेल भेजा हैं। इस मामले में नामजद पूर्व प्रधान पहले ही जेल भेजी जा चुकी हैं।
बेलसर ब्लॉक की ग्राम पंचायत मरगूबपुर में मनरेगा के तहत व्यक्तिगत लाभ के लिए यहां किसानों का चयन किया गया था। गांव में मेड़बंदी व समतलीकरण का कार्य दिखाकर मजदूरों के खाते में भुगतान कर दिया गया। किसानों को उनके खेत में बिना मेड़बंदी कराए ही भुगतान की जानकारी हुई तो इसकी शिकायत दर्ज कराई। सीडीओ शशांक त्रिपाठी के निर्देश पर कराई गई जांच में कार्य न होने का राजफाश हुआ था। जांच के दौरान उक्त खेतों में धान की फसल लगी होने के साथ ही पानी भरा मिला। किसानों ने कार्य न होने की बात बताई। जांच में करीब 78 हजार रुपये के गबन की पुष्टि होने पर मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई थी। डीएम के आदेश पर बीडीओ सदानन्द चौधरी ने ग्राम प्रधान सरोजन, ग्राम विकास अधिकारी राजेंद्र कुमार व तकनीकी सहायक राम उबारन तिवारी के खिलाफ गबन का मुकदमा उमरी बेगमगंज थाने में दर्ज कराया था। जिसके बाद जिला विकास अधिकारी ने ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया था। बुधवार को स्थानीय थाने के दारोगा चंद्रभूषण पांडेय ने मुखबिर की सूचना पर इस मामले में नामजद तकनीकी सहायक राम उबारन तिवारी को गोड़वाघाट तिराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया। थानाध्यक्ष करूणाकर पांडेय ने बताया कि नामजद पूर्व प्रधान सरोजन को जेल भेजा चुका हैं। अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए प्रयास किया जा रहा हैं।
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