गोंडा। 10 माह बाद जूनियर हाईस्कूलों में बुधवार को पढ़ाई शुरू हुई। कोविड संकट से बंद रही पढ़ाई का दौर फिर से शुरू करने के लिए शिक्षक पूरी शिद्दत से जुटे रहे। बेसिक शिक्षा के 901 जूनियर हाईस्कूलों में पहले दिन कक्षा आठ के बच्चे पहुंचे। जिनकी थर्मल स्क्रीनिंग के साथ ही फिजिकल डिस्टेंसिंग की जानकारी शिक्षकों ने दी।
स्कूलों में एक दूसरे से सामग्री के आदान प्रदान पर रोक रही और हाथ धुलने की व्यवस्था पर जोर दिया। कक्षा आठ की पढ़ाई के लिए बच्चों को दो गज की दूरी पर बैठाया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. इंद्रजीत प्रजापति ने कहा कि बच्चों में उत्साह रहा है। शिक्षकों ने भी स्कूलों में बेहतर व्यवस्था बनाए रखी। उन्होंने स्कूल आने वाले बच्चों को शुभकामनाएं दीं।
शासन की ओर से समय सारिणी जारी करके पढ़ाई शुरू करने की व्यवस्था दी है। अभी 50 फीसदी बच्चों को ही बुलाया गया था। शिक्षकों ने अभिभावकों से भी भेंट करके बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही अधिकारियों ने संकुल बैठकों के जरिए पाठ योजना, प्रेरणा लक्ष्य की कार्ययोजना आदि के बारे में विस्तार से बताया।
सहायक शिक्षा निदेशक विनय मोहन वन ने बताया कि हर ब्लाक को प्रेरक ब्लाक बनाने की पहल की जा रही है। उन्होंने बताया कि पढ़ाई में रेमेडियल टीचिंग पर जोर दिया जा रहा है। जिससे की बच्चों को उपचारात्मक शिक्षा दी जा सके। सरकारी स्कूलों के अलावा निजी स्कूलों में पढ़ाई शुरू हुई है। एक मार्च से 2600 प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाई शुरू होगी। इसके लिए शिक्षकों को निर्देश दिया गया है।
झंझरी के छावनी सरकार कंपोजिट स्कूल में संकुल के शिक्षकों के साथ वार्षिक कार्ययोजना पर मंथन हुआ। खंड शिक्षा अधिकारी रामराज ने शिक्षकों को बच्चों और अभिभावकों के बारे में पूरी जानकारी रखने पर जोर दिया। प्रेरणा लक्ष्य हासिल करने के लिए विभाग से मिली किताबों का अध्ययन करें और पूरे साल की कार्ययोजना तैयार कर पढ़ाई कराएं।
प्रधानाध्यापक स्कूल मैनेजर की भूमिका निभाएं। एआरपी हेमंत कुमार, राहुल देव वर्मा, अनीस, शिक्षक नेता वीरविक्रम सिंह, सुरेश सिंह ने विचार रखे। प्रधानाध्यपिका रीता मिश्रा ने स्वागत किया। बच्चों को जूते का वितरण किया और उनका स्वागत किया। शिक्षिका रूही खान, ऊषा सिंह, अंकिता द्विवेदी, संध्या तिवारी, सविता तिवारी, चंदा सिंह, अनामिका आदि रहीं।
पूर्व माध्यमिक स्कूलों में पहले दिन बच्चों के बीच फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन हुआ। स्कूलों में एक दूसरे के बीच काफी दूरी रही। शिक्षकों ने बच्चों को पूरी स्वच्छता के साथ स्कूल आने पर जोर दिया।
मास्क लगाने के बारे में भी बताया। इसके अलावा स्कूलों में बच्चों का वजन आगंनबाडी केंद्रों पर हुआ। स्कूलों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई व्यवस्था न होने का असर भी दिखा। गांव की एएनएम व आशा कार्यकर्त्ताओं को स्कूल में बच्चों की सेहत पर नजर रखने की हिदायत भी थी।
माह जनवरी में ही जिले के 1133 नवनियुक्त शिक्षकों को पढ़ाई का अवसर मिला है। बेलसर के डिडसिया खुर्द कंपोजिट स्कूल की शिक्षिका वैशाली ने बताया कि उन्हें पहली बार बच्चों को पढ़ाने का अवसर मिला है।
बहुत अच्छा लग रहा है। प्रधानाध्यापिका सुनीता सिंह ने कहा कि पढ़ाई शुरू होने से बच्चों में उत्साह है। इसी तरह कई स्कूलों में नए शिक्षकों ने बच्चों को पढ़ाया। फिलहाल प्राइमरी स्कूलों के पहली मार्च से खुलने के कारण अभी सभी को अवसर नहीं मिला, कंपोजिट स्कूल के शिक्षकों को मौका मिल सका है।