जिले में बाल मजदूरी पर अंकुश नहीं लग सका है। तमाम बाल श्रमिक होटलों व ढाबों पर जूठी प्लेटें धोने को मजबूर हैं। परिवार की आर्थिक तंगी के चलते कम पैसे में बाल श्रमिक मजदूरी कर रहे हैं। उधर श्रम प्रवर्तन अधिकारी का दावा है कि एक साल में छापामार 32 बच्चों को बाल श्रम करते हुए पकड़ा गया और उनका स्कूलों में दाखिला कराया जा चुका है। जिले में बाल श्रमिकों के छह परिवारों को 20 से 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद भी मुहैया कराई जा चुकी है। बाल श्रमिकों के परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किए जाने का दावा भी किया जा रहा है।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी वेद प्रकाश चौधरी ने बताया कि जिले में एक जनवरी 2016 से अब तक छापामार अभियान के दौरान कुल 32 बच्चों को बाल श्रम करते हुए पकड़ा गया है। इन बाल श्रमिकों को स्कूलों में दाखिला कराकर रिपोर्ट बेसिक शिक्षा विभाग को सौंप दी गई है।
छह परिवार के बच्चों को पढ़ाई-लिखाई व आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए उन्हें 20 से 25 हजार रुपये की राशि भी प्रदान की गई है। बाल मजदूरों के पुनर्वास के संबंध में कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
केंद्र व प्रदेश सरकार की तरफ से संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ बाल मजदूरों को मुहैया कराया जा रहा है। आवास, पेंशन, छात्रवृत्ति सहित अन्य कई योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराकर बाल श्रमिकों के परिवारों को लाभान्वित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उधर बाल श्रम में लगे परिवार के लोगों का आरोप है कि सरकार की तरफ से संचालित योजनाओं के बार में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। आर्थिक तंगी से निपटने के लिए परिवार के सभी छोटे-बड़े सदस्यों को मजदूरी करना पड़ रहा है।
बातचीत के दौरान कई परिवार ने बताया कि गरीबी के चलते आर्थिक परेशानी रहती है। बच्चों को स्कूल में पढ़ाएं कि परिवार का पालन-पोषण करें। कई परिवार ने सरकार के सहयोग की सराहना भी की और कहा कि योजनाओं का लाभ मिलने के बाद हम लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। स्कूल में बच्चों को ड्रेस, किताबें व भोजन आदि का लाभ मिल रहा है।