गोंडा। भ्रष्टाचार के मामलाें में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार को आईटीआई व मेडिकल कॉलेज के साथ ही मैजापुर गन्ना विकास समिति में चल रहे खेल की शिकायत पर जांच के आदेश हुए हैं। आईटीआई संस्थानों में कौशल विकास केंद्रों के छात्रों से बीते 25 साल से एक हजार रुपये प्रति छात्र वसूली की शिकायत सामने आई है। वहीं, मेडिकल कॉलेज में करीबियों को सामान की आपूर्ति का ठेका दिलाने में नोडल अधिकारी जांच के दायरे में आए हैं। देवीपाटन मंडल के आयुक्त शशिभूषण लाल सुशील ने डीएम को मेडिकल कॉलेज व आईटीआई की जांच कराकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
देवीपाटन मंडल के कौशल विकास केंद्रों और आईटीआई संस्थानों में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली के आरोप लग रहे हैं। आयुक्त ने अधिवक्ता दिवाकर सिंह राजपूत की शिकायत का परीक्षण कर जांच के आदेश दिए हैं। इसमें संयुक्त निदेशक, प्रशिक्षण/शिशिक्षु, देवीपाटन मंडल राजेश राम पर लिपिक परविंदर के माध्यम से पिछले 25 वर्ष से प्रति छात्र 1000 रुपये की अवैध वसूली का आरोप है। आरोप है कि अब तक करीब चार करोड़ रुपये की अवैध वसूली हुई है। आयुक्त के आदेश पर डीएम ने मामले की जांच सीआरओ महेश प्रकाश को सौंपी है। इसके साथ ही महाराजा देवीबख्श सिंह राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में अनियमितताओं की शिकायत की जांच अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा को सौंपी गई है। रघु बाबा समाजसेवा संस्थान, बहराइच के राजकुमार दुबे ने आरोप लगाया है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन की सहमति से लिपिक और मेडिकल कॉलेज के नोडल अफसर कुलदीप पांडेय ने कुछ चहेती फर्मों के नाम से कूटरचित दस्तावेजों का दुरुपयोग किया और सरकारी धन का गबन किया है।
वहीं, गन्ना समिति मैजापुर के सचिव रवींद्र पर फर्जी सट्टा बनवाने के आरोप में शिकायत हुई है। करीब 18 किसानों का ब्योरा भी साक्ष्य के रूप में ग्राम परसागोड़री निवासी विक्रम सिंह ने दिया है। जिसमें जिन किसानों का सट्टा बंद था, उसे भी शुरू किया गया और क्षमता भी बढ़ाई गई। इसकी जांच संयुक्त गन्ना आयुक्त को सौंपी गई है।
मंडलायुक्त शशिभूषण लाल सुशील का कहना है कि किसी भी योजना या विभाग में वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिकायतों की जांच कराई जा रही है, दोषियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।