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कमिश्नर के प्रयास से भी कम नहीं हुआ गतिरोध, 12 को अंतिम निर्णय लेगें डॉक्टर

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गोंडा। सरकारी डॉक्टर और जिलाधिकारी के बीच छिड़ी रार खत्म होने का नाम नहीं ले रही। डीएम के साथ चल रहा डॉक्टरों का गतिरोध खत्म कराने को कमिश्नर एसवीएस रंगाराव की मध्यस्था भी बेअसर साबित दिखी।
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गुरुवार देर शाम को मंडलायुक्त ने इस विवाद को खत्म कराने के लिए जिलाधिकारी व डॉक्टरों के प्रतिनिधि मंडल के साथ बातचीत कर मामले को शांत कराने का प्रयास भी किया लेकिन बैठक बेनतीजा रही।
जिले के मुखिया व स्वास्थ्य विभाग के बीच बीते तीन दिनों से जारी इस रार का सीधा असर कोरोना की आशंकित तीसरी लहर से निपटने से जुड़े कार्यों पर पड़ रहा है। इस मामले को लेकर अब तक 16 सीएचसी प्रभारियों सहित 20 डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं।
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कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए जहां प्रदेश के सभी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चुस्त-दुस्त की जा रही हैं। वहीं जिले में डॉक्टरों व जिलाधिकारी के बीच छिड़ी आपसी रार से आने वाले महामारी से निपटने की तैयारी बाधित पड़ी हैं।
आपसी गतिरोध खत्म कराने को मंडलायुक्त की मध्यस्थता में हुई जिलाधिकारी व डॉक्टरों के प्रतिनिधि मंडल की बैठक भी बेनतीजा रही। पीएमएस के अध्यक्ष डॉ टीपी जायसवाल ने बताया कि बैठक में जिलाधिकारी ने अपनी गलती मानने की जगह गोल मोल जवाब दिया, जिससे संगठन से जुड़े डॉक्टर संतुष्ट नहीं हुए।
डीएम ने बस इतना कह कर बात खत्म करने की कोशिश की कि काम के दबाव में आकर कभी कभार ऐसी भाषा निकल जाती है। अब ऐसा नहीं होगा। पीएमएस संघ का कहना था कि मामला एसीएमओं डॉ एपी सिंह से जुड़ा है इसलिए उनके सामने जिलाधिकारी को अपनी गलती स्वीकारी चाहिए। डॉ एपी सिंह खराब स्वास्थ्य होने के कारण अवकाश पर हैं। फिलहाल इस मामले को खत्म करने पर पीएमएस एसोसिएशन अपना निर्णय अब 12 जुलाई को सुनाएगी।
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