जिले में 3140 परिषदीय प्राथमिक व जूनियर हाई स्कूल हैं। इनमें सवा तीन लाख बच्चे पंजीकृत हैं। उनकी शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें मुहैया कराई जाती हैं। अभी तक जिला मुख्यालय पर बच्चों के अनुपात में सिर्फ 45 फीसदी किताबें मंगवायी गयी हैं।
इनमें भी कक्षा एक से आठ तक की किताबें जिला मुख्यालय पर उपलब्ध नहीं हैं। मुख्यालय पर उपलब्ध किताबें अभी विद्यालयों तक नहीं पहुंच पायीं जिससे परिषदीय विद्यालयों में बिना किताबों के ही शिक्षक पढ़ा रहे हैं। कई स्कूलों में पुराने किताबों का सहारा है।
जिला मुख्यालय नहीं पहुंचीं ये पुस्तकें
कक्षा एक की कार्य पुस्तिका, भाषा, गिनतारा, कक्षा दो की कलरव, गिनतारा, कक्षा तीन की कलरव, गिनतारा, संस्कृत पियूषम, रैनवो, कक्षा चार की परख, परिवेश, रेनवो कार्यपुस्तिका, गिनतारा व कक्षा पांच की गिनतारा, रेनवो, गिनतारा पुस्तिका विभाग के पास आज तक उलब्द्ध नहीं हो पायी हैं। बताते चलें कि प्राइमरी सेक्शन में कक्षा एक से पांच तक की कक्षाओं के लिए सरकार द्वारा तीस किताबें चलायी जा रही हैं।
जूनियर की नहीं आयीं पूरी पुस्तकें
जूनियर में 33 किताबों से पढ़ाई होती है। उनमें कक्षा छ की मंजरी, गणित, विज्ञान, रेनवो, महान व्यक्तित्व, कृषि विज्ञान, गृह शिल्प, हमारा प्रर्यावरण, स्काउट गाइड, खेल स्वास्थ्य, कक्षा आठ की रेनवो, कृषि विज्ञान, मंजरी आदि पुस्तकें आज तक गोदाम तक नहीं पहुंचीं। किताबें न होने से विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था ध्वस्त है।
स्कूलों में भेजी जा रही पुस्तकें
मुख्यालय पर उपलब्ध किताबें स्कूलों में भेजी जा रही हैं। बीआरसी प्रभारियों व न्याय पंचायत प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शीघ्र बीआरसी से पुस्तकों को ले जाकर बच्चों में वितरित करें। -फतेह बहादुर सिंह, बीएसएx