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देवी मां के जयकारों से गूंजायमान हुए मंदिर

Sun, 10 Apr 2016 11:25 PM IST
अमर उजाला/बलरामपुर
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पूजा करते भक्त - फोटो : अमर उजाला
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चैत्र नवरात्र की चतुर्थी को मां भगवती के चौथे स्वरुप देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना के लिए देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। रविवार को देवी के जयकारों से मंदिरों के साथ आसपास का क्षेत्र गूंजायमान रहा। शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में भोर से ही श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर देवी की आराधना की। मंदिरों में भक्तों ने शाक-सब्जी व अन्न का दान कर परिवार की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। 
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मां भगवती के चौथी शक्ति का नाम देवी कूष्मांडा है। नवरात्र चतुर्थी के दिन देवी के इसी स्वरुप की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी पुराण के अनुसार ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी कूष्मांडा ने ही सृष्टि का विस्तार किया।

प्रकृति का दोहन व लोगों को भूख-प्यास से व्याकुल देखकर मां कूष्मांडा ने धरती को शाक से पल्लवित किया। माता ने शाक पल्लवित कर जहां लोगों की भूख-प्यास मिटाई वहीं शताक्षी बनकर असुरों का संहार भी किया।
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ऐसी मान्यता है कि प्रकृति और पर्यावरण की अधिष्ठात्री मां कूष्मांडा की चतुर्थी को पूजा-अर्चना करके शाक-सब्जी व अन्न का दान करने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है।

रविवार को देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना के लिए शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। सूर्य कुंड में स्नान कर भक्तों ने मां पाटेश्वरी का दर्शन किया और उनकी पूजा-अर्चना करके मानव कल्याण की कामना की।

देवी के जयकारों से देवीपाटन मंदिर के साथ पूरा क्षेत्र दिन भर गुंजायमान रहा। इस दौरान भक्तों ने देवी के परम भक्त एवं शिव अवतार गुरु गोरक्षनाथ का दर्शन भी किया।

इसके साथ तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, जरवा स्थित रहिया देवी मंदिर, बिजलीपुर स्थित बिजलेश्वरी देवी मंदिर, नगर स्थित झारखंडी मंदिर, कालीथान, सम्मय माता मंदिर, बड़की बहिनी मंदिर, उतरौला स्थित ज्वालादेवी व काली देवी मंदिर, महुआ स्थित करिया दुर्गा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भी भक्तों ने पूजा-अर्चना की।
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