शुक्रवार की रात कुछ ऐसा ही नजारा तरबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर देखने को मिला। यहां अस्पताल के गेट पर बैठी एक प्रसूता घंटों एंबुलेंस का इंतजार करती रही, लेकिन उसे एंबुलेंस मुहैया नहीं हो पाई।
हालांकि रात 10 बजे खबरनवीसों से हुई जानकारी के बाद अधीक्षक ने महिला का चेकअप करवाने के बाद उसे घर भिजवाया। बताते हैं कि तरबगंज के बारह फाटक गांव निवासी महिला शिमला देवी ने तरबगंज सीएचसी पर शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे एक बच्चे को जन्म दिया।
इसके बाद महिला को सीएचसी से घर जाने की बात कहकर उसे सीएचसी से बाहर कर दिया गया। यह महिला रात 9 बजे तक 108 नंबर एंबुलेंस के इंतजार में कभी सीएचसी के गेट पर तो कभी सड़क के आसपास इस आस से घूमती रही कि उसे एंबुलेंस मिल जाएगी, लेकिन नौ घंटे बीतने के बाद भी उसे एंबुलेंस नहीं मिली।
यही नहीं सीएचसी से भी किसी तरह की कोई मदद महिला को नहीं मिली। पीडिता की सास प्रेमा देवी ने बताया कि उन्होंने अस्पताल के लोगों से कई बार एंबुलेंस के लिए कहा, लेकिन सबने एंबुलेंस खराब होने की बात कहकर उन्हें टरका दिया। पास में इतने पैसे नहीं थे कि किसी निजी वाहन की व्यवस्था कर लें।
आशा बहू से भी इस मामले में मदद मांगी गई तो उन्होंने भी मायके में होने की बात कहकर अपना पल्लू झाड़ लिया। इसके कारण कई घंटे रात पीड़ित प्रसूता महिला के साथ उसके नवजात बच्चे व अन्य परिवारीजनों को सीएचसी के बाहर बितानी पड़ी।
मामले में खबरनवीसों के सीएचसी अधीक्षक डॉ. नीरज गुप्ता से पूछे जाने पर उन्होंने ऐसी किसी जानकारी से पहले तो इंकार किया। लेकिन बाद में वास्तविक स्थिति का पता चलने पर उन्होंने महिला का चेकअप करवाने के बाद उसे देर रात घर भिजवाया।
डॉ. नीरज गुप्ता ने बताया कि मामले की जांच में स्टाफ के जिस किसी कर्मी की लापरवाही उजागर होगी, उसे दंडित किया जाएगा।