आल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन के चेयरमैन इंजीनियर शैलेंद्र दुबे ने केंद्र सरकार पर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि छह नवंबर को केंद्र सरकार में ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने देशभर के बिजली मंत्रियों की जो बैठक कोच्चि (केरल) में बुलाई है, उसका मकसद पावर सेक्टर में पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने का है, ताकि मुनाफे का लाभ पूंजीपति उठाएं और घाटा सरकार को झेलना पड़े।
शुक्रवार को आरक्षण के मुद्दे पर पांच नवंबर को लखनऊ में होने वाली रैली का विभिन्न संगठनों को न्यौता देने गोंडा आए इंजीनियर शैलेंद्र दुबे ने केंद्र सरकार में ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल पर हमला बोलते हुए उन्हें पावर सेक्टर के निजीकरण का जिम्मेदार बताया।
साथ ही कहा कि ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल पूंजीपतियों से मिले हुए हैं। वह चाहते हैं कि कमाई का सारा काम पूंजीपति करें और घाटे का सारा काम सरकार पर छोड़ दें।
पावर सेक्टर में ट्रांसमिशन लाइनों का जो नेटवर्क सरकार खड़ा कर रही है, उसका काम तो वह सरकार से कराना चाहते हैं, जबकि बिजली के खंभों से लोगों के घरों तक पहुंचने वाली विद्युत का सारा काम वह निजी कंपनियों (जिसके मालिक पूंजीपति हैं) को सौंपना चाहती है, ताकि करोड़ों रुपये खर्च कर सरकार बिजली की लाइनों का नेटवर्क खड़ा करे और उसका फायदा अमीर घराने उठाएं।
लेकिन केंद्र सरकार की इस मंशा को वह कभी पूरा नहीं होने देंगे। छह नवंबर को इसके खिलाफ देशभर की छह यूनियनों जिसमें आल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन, आल इंडिया फेडरेशन ऑफ पावर डेवलपमेंट इंजीनियर, एटक, सीटू टिंटैक व अन्य शामिल हैं के लाखों पदाधिकारी व कार्यकर्ता कोच्चि में घेरा डालेंगे।
साथ ही इसके खिलाफ आठ दिसंबर को पूरे देश में राष्ट्रव्यापी हड़ताल भी की जाएगी। इसके लिए भी उन्होंने कर्मचारी संगठनों से सहयोग की अपील करते हुए इसे सफल बनाने को कहा।