गोंडा। शहर के सिविल लाइंस में तीन एकड़ भूमि पर कब्जा करके सौदेबाजी के मामले की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। इस आधार पर अब अधिकारी भी मान रहे हैं कि सरकारी जमीनों पर कब्जे की तैयारी भूमाफिया तहसील के अभिलेखागार से शुरू करते हैं। ऐसे में अब प्रशासन ने अभिलेखागार की निगरानी शुरू कर दी है। तहसील के दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने के मामलों की फिर से पड़ताल होगी। पूर्व में आए मामलों के पीछे रसूखदार लोगों का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। जबकि तहसील के राजस्व कर्मचारी भी संदेह के घेरे में हैं।
सिविल लाइंस में तीन एकड़ भूमि पर कब्जे के मामले में कार्रवाई के बाद प्रशासन हर स्तर पर जांच में जुटा है। शहर की सीमा से सटे गांवों में सरकारी जमीनाें की निगरानी बढ़ाने के साथ ही अब राजस्व दफ्तरों की छानबीन की तैयारी है। एसडीएम सदर विनोद कुमार सिंह ने तहसीलदार सदर के साथ ही प्रभारी नायब तहसीलदार अभिलेखागार और रजिस्ट्रार कानूनगो अभिलेखागार को हर दस्तावेज की पड़ताल करने का निर्देश दिया है। उन्होंने आशंका जताई कि जमीन पर कब्जे के मामले में कुछ कूटचरित दस्तावेज दाखिल किए गए हैं।
एसडीएम ने निर्देश दिया है कि अभिलेखों की जांच कर लें और कूटचरित दस्तावेजों को चिह्नित कर एफआईआर दर्ज कराएं। एसडीएम ने एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही बिना परीक्षण के दस्तावेजों के नकल जारी करने पर रोक लगा दी है। कारण कूटचरित दस्तावेज को दफ्तर में शामिल कराकर फिर प्रमाणित प्रतिलिपि हासिल की जाती है और उसी के सहारे जमीनों पर कब्जे का खेल होता है। अब पहले दस्तावेजों का परीक्षण होगा। जब स्पष्ट होगा कि दस्तावेज पूरी तरह सही है तभी नकल जारी की जाएगी।
तहसील के दस्तावेजों में हेराफेरी कर 0.097 हेक्टेयर सरकारी जमीन को आठ लोगों को बेचने का मामला बीते साल नवंबर माह में उजागर हो चुका है। जिसमें लेखपाल मस्तराम वर्मा ने नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। सदर तहसील के ग्राम बिसवागनेश की खतौनी खाता संख्या 186 के गाटा संख्या 342/0.081 हेक्टेयर व गाटा संख्या 340/0. 016 हेक्टेयर बंजर (सरकारी भूमि) में दर्ज है। नंद किशोर निवासी ग्राम बिसवागनेश ने तहसील अभिलेखागार में जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी कर इस जमीन के कूटरचित दस्तावेज तैयार किए थे। फिर विसवा गनेश के अजय कुमार शुक्ल, मलारी की संजू, विसवा गनेश की केवला, रेखा, राहुल कुमार, अनुरुद्ध कुमार व अजय कुमार एवं विशुनपुर बैरिया के विनोद कुमार को ये जमीन बेच दी थी।
अभिलेखागार में सुरक्षित गांवों के अभिलेखों में हेराफेरी के मामले में सदर तहसील के दो कर्मचारी पहले से जांच के दायरे में हैं। बिना किसी आदेश के ही सरकारी भूमि दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज हो गई। जबकि अन्य दस्तावेजों में वह बंजर यानी सरकारी भूमि ही दर्ज रही। इस पर अभिलेखागार में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो गिरीश चंद्र सोनकर के साथ ही पूर्व में इसी पद पर कार्यरत रहे हरिओम की जांच हो रही है। अब तहसील के अन्य दस्तावेजों की भी पड़ताल होगी।
एसडीएम सदर विनोद कुमार सिंह का कहना है कि तहसील के अभिलेखागार में निगरानी बढ़ाई गई है ताकि सुरक्षित अभिलेखों में किसी तरह की हेराफेरी न होने पाए। यदि कोई मामला है तो वह सामने आ सके और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं।