समाज कल्याण विभाग की देखरेख में संचालित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों को शैक्षिक सत्र के चार माह बीत जाने के बाद भी सीबीएसई से मान्यता नहीं मिल पाई है। ऐसे में इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को सीबीएसई से पढ़ाने के विभाग के मंसूबे पर पानी फिर गया है। चार माह तक छात्र-छात्राओं को सीबीएसई की किताबों से पढ़ाई कराने के बाद अब इन छात्रों को फिर से यूपी बोर्ड की किताबों से पढ़ना पड़ रहा है। जिससे इन स्कूलों में पढ़ने वाले 32 हजार छात्र-छात्राओं को भविष्य में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्र-छात्राओं समेत सामान्य वर्ग के गरीब बच्चों को शिक्षा देने के लिए प्रदेश में 67 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों का संचालन हो रहा है। कक्षा एक से 12 तक की कक्षाओं में 32160 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
समाज कल्याण विभाग पूरे प्रदेश में इन आश्रम पद्धति विद्यालयों का संचालन करता है। प्रत्येक विद्यालय में 480 छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के साथ आवासीय सुविधा भी दी जाती है। पिछले शैक्षिक सत्र में समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव ने शैक्षिक सत्र 2016-17 से इन विद्यालयों को सीबीएसई से संचालित करने का फैसला किया था। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों को तैयारी करने के निर्देश दिए गए थे।
इन तैयारियों के क्रम में सीबीएसई की मान्यता के लिए अधिकारियों ने मार्च 2016 में प्रस्ताव तैयार कर समाज कल्याण निदेशालय को भेज दिया था। मान्यता के साथ-साथ सीबीएसई पैटर्न से पढ़ाई कराने के लिए अध्यापकों की भर्ती भी किए जाने का प्रस्ताव था। लेकिन समय से न तो इन स्कूलों में योग्य अध्यापकों की भर्ती ही हो सकी और न ही सीबीएसई से मान्यता ही मिल पायी।
इसके बावजूद मान्यता मिल जाने की आस में समाज कल्याण विभाग ने नए शैक्षिक सत्र के अप्रैल से इन स्कूलों का संचालन सीबीएसई पद्धति से प्रारंभ कर दिया। इसके लिए विभाग ने सीबीएसई की किताबें भी छात्र-छात्राओं को दे दीं। अधिकारियों को उम्मीद थी कि जुलाई के पहले इन स्कूलों को सीबीएसई की मान्यता मिल जाएगी।
इसको लेकर अधिकारी अप्रैल से लेकर अगस्त तक मान्यता हासिल करने के लिए चक्कर लगाते रहे, लेकिन मान्यता नहीं मिल सकी। अब शिक्षा सत्र के चार माह बीत जाने के बाद इसके बाद अधिकारियों को फिर से यूपी बोर्ड की याद आई है।
चार माह तक असमंजस में रहने के बाद विभागीय अधिकारी एक बार फिर से यूपी बोर्ड के पुराने ढर्रे पर लौट आए हैं। आधा शैक्षिक सत्र तक सीबीएसई की किताबों से पढ़ाई कराने के बाद अब एक बार फिर से इन छात्र-छात्राओं की किताबें बदली जा रही हैं और यूपी बोर्ड की किताबों से पढ़ाई कराई जा रही है।
राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों को सीबीएसई से चलाने के लिए समाज कल्याण विभाग ने इन स्कूलों में अध्यापकों की भर्ती करने का फैसला किया था। इसके तहत जिले के तीन स्कूलों में 24 अध्यापकों की भर्ती की जानी थी। विभाग ने इसके लिए विज्ञापन जारी कर आवेदन पत्र मांगे थे, लेकिन यह प्रक्रिया केवल आवेदन पत्रों तक ही सिमट कर रह गई और अब तक इन स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती नही कीं जा सकी है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी गोंडा अमरजीत सिंह का कहना है कि विद्यालयों की मान्यता को लेकर प्रस्ताव विभाग को भेजा चुका है। लेकिन मान्यता क्यों नहीं मिली, इस संबंध में उच्च अधिकारी ही कुछ बता सकते है। फिलहाल बच्चों के भविष्य को देखते हुए कक्षा 9 व 11 के छात्र-छात्राओं को यूपी बोर्ड की किताबों से पढ़ाई कराई जा रही है। शिक्षकों की भर्ती के लिए मेरिट तैयार की जा रही है।