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सीबीआई ने दर्ज किए ग्राम प्रधान, कोटेदार व राशनकार्ड धारकों के बयान

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गोंडा। खाद्यान्न घोटाले की जांच में जुटी सीबीआई टीम ने दूसरे दिन गुरुवार को तत्कालीन ग्राम प्रधान, कोटेदार व राशनकार्ड धारकों के बयान दर्ज किए हैं। सीबीआई ने प्रधानों की ओर से जारी किये गये वितरण प्रमाण पत्र का भी सत्यापन किया। सीबीआई टीम अभी दो-तीन दिन जिले में रहकर आरोपियों के बयान दर्ज करेगी।
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बता दें कि वर्ष 2004 से 2006 तक काम के बदले अनाज योजना में जनपद में घोटाला हुआ था। अनाज घोटाने में खाद्यान्न माफिया ने काम के बदले अनाज योजना का राशन बांग्लादेश भेज दिया था, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है। सीबीआई इंस्पेक्टर सभाजीत चैहान के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय टीम 07 अक्तूबर को घोटाले की जांच करने को यहां डेरा डाल चुकी है। इससे घोटाले से जुड़े लोगों की धुकधुकी बढ़ गई है।
गुरुवार को छपिया व कटरा ब्लॉक के कोटेदार, अंत्योदय, बीपीएएल राशनकार्ड धारकों के बयान दर्ज किये हैं। सीबीआई ने छपिया के तकरीबन डेढ़ दर्जन तत्कालीन प्रधानों को नोटिस दिया है। कुछेक के बयान भी दर्ज किये हैं। सीबीआई ने तत्कालीन ग्राम प्रधानों की ओर से जारी किये गये खाद्यान्न वितरण प्रमाण पत्र के बारे में पूछताछ की। तत्कालीन ग्राम प्रधानों से सवाल किया कि जो वितरण प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, वो उन्होंने ही जारी किया है। कहीं जिम्मेदारों ने घोटाला की साजिश रचकर फर्जी वितरण प्रमाण पत्र तो नहीं तैयार किया है।
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पूछा कि राशनकार्ड धारकों को खाद्यान्न मिला कि नहीं, मिला तो कितना मिला। सीबीआई ने इस प्रकार के कई सवाल किए और उनके बयान दर्ज किए। खाद्यान्न ढुलाई करने वाले कई ट्रांसपोर्टर भी सीबीआई के निशाने पर हैं, जो एसएफसी से खाद्यान्न उठाकर कोटेदारों की दुकान तक पहुंचाते थे। सीबीआई ने अभी तक 12 ब्लाकों की जांच कर चुकी है। इसमें माननीयों के करीबियों की भूमिका भी सीबीआई खंगाल रही है। मंडी के कई व्यापारी भी घोटाले की जद में हैं। सीबीआई घोटाला वर्ष में मंडी के व्यापारियों के द्वारा बेचे गए गेहूं चावल से संबंधित अभिलेख भी एकत्र कर रही है।
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