गोंडा। गोंडा, लखनऊ और बाराबंकी में लगातार हो रही मवेशी चोरी की घटनाएं महज छोटे अपराध नहीं थे, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह का पूरा नेटवर्क काम कर रहा था। पुलिस मुठभेड़ में पकड़े गए बदमाशों से पूछताछ में जो खुलासा हुआ, उसने इस पूरे खेल की परतें खोल दी हैं।
दरअसल, यह गिरोह शातिर तरीके से काम करता था। दिन में सब्जी की ढुलाई और रात में मवेशियों की चोरी, यही इनका तरीका था। गिरोह का एक बदमाश मैनुद्दीन लखनऊ की मंडी से बहराइच तक सब्जी पहुंचाने का काम करता था। इसी बहाने वह रास्तों और गांवों की रेकी करता था। जहां मौका मिला, वहीं से मवेशी चोरी कर लिए जाते थे।
चोरी के बाद मवेशियों को सीधे बहराइच के खैरीघाट इलाके के बेंहड़ा बाजार ले जाया जाता था। वहां पहले से तय खरीदार मौजूद रहते थे। गाय 25 हजार रुपये और भैंस 50 हजार से एक लाख रुपये तक में बेची जाती थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि खरीद के बाद इन मवेशियों को करीब 45 किलोमीटर दूर नेपाल सीमा तक पहुंचा दिया जाता था। सीमा पार होते ही मवेशियों का कोई रिकॉर्ड नहीं रह जाता, जिससे पुलिस के लिए गिरोह तक पहुंचना लगभग नामुमकिन हो जाता था।
विवेचक सत्यप्रकाश सिंह के अनुसार गिरोह का सरगना समीर है, जो पूरे नेटवर्क को संचालित करता था। उसके इशारे पर अन्य बदमाश अलग-अलग जिलों में वारदात को अंजाम देते थे।