तुलसीपुर (बलरामपुर)। बेसिक शिक्षा विभाग में लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। 31 मार्च 2021 को फर्जी डिग्री पर नौकरी कर रही शिक्षिका के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश बीएसए ने दिया था। लेकिन, संबंधित अफसरों ने अनुपालन नहीं कराया। अब जब एक बार फिर खोजबीन शुरू हुई तब जाकर 693 दिन बाद बृहस्पतिवार को मुकदमा दर्ज कराया गया।
जिले के तुलसीपुर शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सेमरहन में प्रधानाध्यापक के पद पर अमिता शुक्ला की तैनाती थी। मानव संपदा पोर्टल पर एक ही शैक्षिक अंकपत्र व प्रमाणपत्र पर चार शिक्षकों का विवरण प्रदर्शित कर रहा था। इसमें बुलंदशहर में कार्यरत अमिता शुक्ला का विवरण व तुलसीपुर में तैनात अमिता का विवरण एक समान था। बुलंदशहर में तैनात अमिता की प्रथम नियुक्ति तिथि 20 फरवरी 2009 थी। जबकि बलरामपुर में कार्यरत अमिता की प्रथम नियुक्ति तिथि तीन अगस्त 2010 थी। जांच में पाया गया कि जिस शिक्षिका की नियुक्ति बाद में हुई है, उसने दूसरे के अभिलेख का प्रयोग किया है।
इस पर तत्कालीन बीएसए ने संबंधित शिक्षिका का वेतन रोकते हुए उसे अपना पक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। लेकिन शिक्षिका आई नहीं। इस पर 31 मार्च 2021 को उसे बर्खास्त करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी तुलसीपुर को रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था। तबसे मामला दबा हुआ था। अब जब बीएसए कल्पना देवी ने फाइलें खंगालनी शुरू की तो इसकी जानकारी हुई। बीएसए के दोबारा आदेश पर तुलसीपुर थाने में खंड शिक्षा अधिकारी रमेश कुमार ने जालसाजी में मुकदमा दर्ज कराया है। एएसपी नम्रिता श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित थाने की पुलिस मामले की जांच कर रही है।
क्या है तर्क
31 मार्च 2021 को बीएसए ने संबंधित शिक्षिका को बर्खास्त करने के साथ ही एफआइआर दर्ज कराने का आदेश खंड शिक्षा अधिकारी को दिया था। कहा जा रहा है कि तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी महेंद्र कुमार का स्थानांतरण हो गया था। उनके स्थान पर नियुक्त किए गए खंड शिक्षा अधिकारी अरुण कुमार वर्मा का निलंबन हो गया था। इसके कारण इसमें देरी हुई। वैसे जिले में अब तक 120 फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं।