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वोटरों को लुभा रहे प्रत्याशी

Sun, 15 Nov 2015 10:55 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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प्रधान बनते ही कॉलोनी दिलाएंगे, सड़क व नाली बनवाएंगे, बेटी की शादी में सहयोग देंगे, पूरा समर्थन दो कोई भी बाल बांका नहीं कर पाएगा। ऐसे जुमले व वादे इस समय गांव के गलियारों में गूंज रहे हैं। वादे के साथ प्रलोभन भी दिया जा रहा है कि प्रधान बनते ही सबसे पहले तुम्हारा काम करेंगे। प्रधान पद के चुनाव का बिगुल बजते ही ये अब आम हो चला है।
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गरीबों को राशन, मिट्टी का तेल, पेंशन का लाभ देने के वादे किए जा रहे हैं। प्रधानी चुनाव को लेकर कुछ प्रत्याशी अपने गांव के पट्टीदारों को मिलाने के लिए काका, बाबा, दादा को प्रणाम कर उन्हें मनाने का प्रयास कर रहे हैं और गैर बिरादरी को जोड़ने के लिए नए-नए हथकंडे भी अपनाए जा रहे हैं।

वहीं विपक्षी भी उसका तोड़ निकालकर नशेड़ियों को रुपये का लालच देकर अपने पाले में मिलाने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ प्रत्याशी अपने समर्थकों को विपक्षी खेमे के समर्थकों व मतदाताओं का मिजाज जानने व उनकी डिमांड के बारे में जानकारी लेकर लुकाछिपी कर अपने प्रत्याशी की मुखबिरी का कार्य कर रहे हैं।
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प्रधान पद के प्रत्याशी गरीबों की सेवा के नाम पर मोटी रकम देकर अपने खेमे में जोड़ रहे हैं। वर्तमान प्रधान व प्रत्याशी पांच साल के कराये गये विकास कार्यों को गिना रहे हैं और जिनको पेंशन, मनरेगा, आवास योजना का लाभ दिलाया, उन्हें अपने साथ उदाहरण के तौर पर लेकर अन्य मतदाताओं को लुभाने में लगे हुए हैं।

कुछ प्रत्याशी मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए बैंक में खाता खोलवाकर खुद पंद्रह सौ से दो हजार रुपये तक जमा कर रहे हैं।

कहते है कि समाजवादी व वृद्धा पेंशन आपकी आनी शुरू हो गई है, जिसकी पहली किश्त आ गई है और अब तीन माह बाद फिर आएगी।

कुछ प्रत्याशी गांव के मतदाताओं के साथ ही माननीय को मनाने के लिए जी हजूरी में लगे हैं। उनका मानना है कि यदि गांव के मतदाताओं ने धोखा दिया तो माननीय मतगणना में भी उनकी कुछ मदद कर देगें तो उनका बेड़ा पार हो जाएगा।

पंडरीशंकर गांव के बच्चूलाल का कहना है कि प्रधानी चुनाव का होइगा ये सब दिन रात जिव आजिज किहा हैं। हमैय जहां वोट देयक है, हम जानित हैं। हमैं आपसे कुछ न चाही। अबहीं आप ईमानदारी कै पाठ पढ़ावत हौ, जब परधान होई जाबव तब गिरगिटान घस रंग बदल देबव।

जानकीनगर के मतदाता आशुतोष का कहना है कि प्रधानी चुनाव में आपन हियां सब मैनेज है। मैनेज का मतलब ये मतदाता आपन समर्थक हैं और इनकै व्यवस्था होय गयी है। जहां चाहब हुआं वोट देहैं।

जयनगरा गांव के मतदाता लल्लू का कहना है कि उनके गांव के लोग कहते हैं कि उनके खाते मां पिंशिन आइगा है। प्रत्याशी खुद की जेब से मतदातन के खाता मां पैसा जमा कइकै बतावत हैं कि उनके खाता मां पैसा आइगा है। ये मतदाताओं को गुमराह कर अपने पक्ष में मतदान कराने का फंडा है।

सिसई के ओमप्रकाश का कहना है कि प्रत्याशी गांव के मतदाताओं को रिझाने के लिए देवी-देवताओं के साथ अपने बच्चों व परिवारीजनों की कसमें खा रहे हैं कि यदि मैं आपके वादो व बातों पर खरा नहीं उतरा तो भगवान उन्हें व उनके परिवारीजनों को उसका दंड देगा।

तिवारीपुुरवा के मनोज तिवारी का कहना है कि प्रधानी चुनाव आते ही प्रत्याशियों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए चाय व पान की दुकानों पर सब सामान फ्री हो गया है। मतदाता आया और समान लिया तो प्रत्याशी के खाते में हिसाब चढ़ जाता है और शाम को प्रत्याशी उसका हिसाब भर देता है।
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