गोंडा। बस्ती तक बह रही मनोरमा नदी के पुनरुद्वार को लेकर डीएम नेहा शर्मा की पहल मंगलवार को धरातल पर दिखी। पारंपरिक नदियों के संरक्षण और दोबारा जीवित करने के लिए चलाए जा रहे अभियान में सिसई बहलोलपुर में जिलाधिकारी नेतृत्व में अभियान का आगाज हुआ।
पंडरी कृपाल, इटियाथोक, रुपईडीह एवं मुजेहना ब्लॉकों से आए ग्रामीणों, युवाओं, ग्राम प्रधानों, स्वयंसेवी संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों सहित 200 से अधिक लोगों ने श्रमदान कर इस पहल को जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया। डीएम ने श्रमदान कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि मनोरमा नदी केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक स्मृति, परंपरा और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का प्रतीक है। इसका पुनर्जीवन जिले के स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है।इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अंकिता जैन समेत कई लोग मौजूद रहे।
यह होगा काम
नदी के पुनर्जीवन के लिए गोंडा-बलरामपुर रोड से लेकर ताड़ी लाल गांव तक नदी की गाद और अतिक्रमण को हटाकर जलधारा को पुनः प्रवाहित किया जाएगा। इसके लिए जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। साथ ही नदी के दोनों किनारों पर पीपल, नीम और पाकड़ जैसी देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण कर हरियाली और जैव विविधता को पुनर्स्थापित करने की योजना है। वन विभाग को पौधरोपण की जिम्मेदारी व सिंचाई विभाग को नदी के प्रवाह पथ और संरचना का तकनीकी आकलन करने का दायित्व सौंपा गया है।
पहली बार हुआ प्रयास
मनोरमा नदी का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व अत्यंत समृद्ध रहा है। लगभग 115 किलोमीटर लंबी यह नदी गोंडा जनपद के तिर्रे ताल से निकलकर बस्ती जिले के महुली क्षेत्र में कुआनो नदी से मिलती है। इसका उल्लेख पुराणों में महर्षि उद्दालक की पुत्री मनोरमा के नाम से मिलता है और यह मखौड़ा धाम के समीप बहती हुई धार्मिक आस्था का केंद्र रही है। बीते वर्षों में इसके अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया था।