गोंडा। कैसरगंज सांसद व भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर लगे महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच तेज हो गई है। दिल्ली में शुक्रवार को सांसद ने एसआईटी के सामने बयान दर्ज कराए और आरोपों से इंकार किया। वहीं, प्रदेश शासन ने बृजभूषण को लेकर जरूरी ब्योरा तलब किया है। बृजभूषण की हिस्ट्रीशीट की रिपोर्ट मांगी गई है, जिस पर शुक्रवार को पूरे दिन नवाबगंज थाने में मंथन हुआ।
छह बार के सांसद और तीन बार भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहे बृजभूषण शरण सिंह ने शुक्रवार को दिल्ली में एसआईटी के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। इसी बीच उत्तर प्रदेश शासन ने सांसद के बारे में रिपोर्ट मांगी है। नवाबगंज थाने में बृजभूषण के खिलाफ दर्ज केस और हिस्ट्रीशीट के बारे में जानकारी मांगी गई है। शुक्रवार को थाने में बृजभूषण की फाइलें खंगाली गईं। फिलहाल पूरी कार्रवाई को गोपनीय रखा जा रहा है और कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है, मगर थाने में चल रही कवायद की खासी चर्चा है।
कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर साल 1974 से 2007 तक 38 मामले दर्ज होने की बात कही जा रही है। जिसमें चोरी, दंगा, हत्या, आपराधिक धमकी, हत्या का प्रयास, अपहरण आदि के साथ ही चुनाव के दौरान विवादों के मामले भी दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार यूपी गुंडा अधिनियम के तहत एक मामला और उस अवधि में गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत तीन अन्य मामले भी दर्ज हुए थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में बृजभूषण के चुनावी हलफनामे में कहा गया कि उस समय उनके खिलाफ केवल चार मामले लंबित थे और दो में उन्हें बरी कर दिया गया था। दो लंबित मामले आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित हैं। वैसे थाने की रिपोर्ट मानें तो साल 1987 में बृजभूषण शरण सिंह की हिस्ट्रीशीट खुली थी। जो साल 2011 में निगरानी की आवश्यकता न होने की रिपोर्ट से लंबित कर दी गई थी। थाने में सांसद के खिलाफ नवाबगंज, गोंडा, अयोध्या और दिल्ली में दर्ज मामलों का रिकॉर्ड ही है। शासन से रिपोर्ट मांगे जाने पर नवाबगंज पुलिस ने मामलों की छानबीन शुरू कर दी है।