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Gonda: पैतृक गांव मनकापुर पहुंचा पूर्व सांसद कुंवर आनंद सिंह का शव, शोक में बाजार बंद; अंतिम दर्शन को लगी भीड़

Mon, 07 Jul 2025 05:20 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा

सार

पूर्व सांसद कुंवर आनंद सिंह का लखनऊ में निधन होने के बाद सोमवार को उनका शव पैतृक गांव मनकापुर लाया गया। यहां शोक में व्यापारियों ने दुकानें बंद रखीं। उनके अंतिम दर्शन को लोगों की भीड़ लगी रही। 
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पैतृक गांव मनकापुर पहुंचा पूर्व सांसद कुंवर आनंद सिंह का शव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के पिता पूर्व सांसद कुंवर आनंद सिंह का रविवार की रात लखनऊ में निधन हो गया। सोमवार को उनका शव पैतृक गांव मनकापुर कोट लाया गया। यहां अंतिम दर्शन को लोगों की भीड़ लगी रही। पूर्व सांसद के निधन पर मनकापुर बाजार, मसकनवा व गोंडा शहर में व्यापारियों ने दुकानें बंद रखकर शोक जाहिर किया। स्कूलों में शोकसभा का आयोजन किया गया। केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री के आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। 

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पूर्व सांसद आनंद सिंह का जन्म 4 जनवरी 1939 को हुआ था। गोंडा संसदीय क्षेत्र से 5वीं , 7वीं , 8वीं और 9वीं लोकसभा के लिए संसद सदस्य चुने गए थे। 2012 से 2017 तक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में वह कृषि मंत्री भी रहे। इसके बाद से उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया था। उनके पुत्र गोंडा से भाजपा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह वर्तमान में केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री है। 

यूपी टाइगर की मिली थी उपाधि

पूर्व मंत्री के करीबी केबी सिंह ने बताया कि राजा आनंद सिंह एक-दो बार नहीं, चार बार सांसद रहे। पूर्वांचल की राजनीति में अपने सियासी दबदबे का लोहा मनवाने वाले मनकापुर के राजा आनंद सिंह को यूपी टाइगर के नाम से जाना जाता था। एक वक्त की बात थी कि कांग्रेस पार्टी उन्हें सादा सिंबल दे देती थी, फिर आनंद सिंह जिसे चाहते नाम भरकर सिंबल दे देते थे। जिसके सिर पर मनकापुर कोट का हाथ होता था, वह सांसद, विधायक, जिला परिषद अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख बन जाता था। वर्ष 2012 में राजा आनंद सिंह ने गौरा विधान सभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता। प्रदेश की अखिलेश सरकार में कृषि मंत्री रहे। 

यह है राजनीतिक करिअर 

1971 में आनंद सिंह गोंडा लोकसभा सीट से निर्वाचित हुए थे। इसके बाद 1980, 1984 और 1989 में भी वह कांग्रेस के टिकट पर गोंडा से सांसद बने। राम लहर में 1991 के आम चुनाव में बृजभूषण ने आनंद सिंह को शिकस्त दी। इसके बाद 1996 में उनकी पत्नी केतकी देवी सिंह ने भी बीजेपी के टिकट पर आनंद सिंह (एसपी उम्मीदवार) को एक बार फिर मात दी। इसके बाद से आनंद सिंह ने संसदीय चुनाव से दूरी बना ली। हालांकि बाद में विधानसभा चुनाव जरुर लड़े थे।

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