गोंडा के घारीघाट बिजली उपकेंद्र क्षेत्र में लाइन दुरुस्त करते कर्मी।
गोंडा। बार-बार 33 केवीए लाइन टूटकर गिरने, जर्जर तारों की वजह से बिजली सप्लाई बाधित होने और ओवरलोड के कारण ट्रांसफार्मर फूंकने से बिजली गुल होने की संकट से जल्द राहत मिलेगी। उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली देने के लिए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम तैयारी कर रहा है। देवीपाटन मंडल के सभी जनपदों में 434 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मंडल में 62 नए फीडर शीघ्र बनकर तैयार हो जाएंगे।
लाइन लॉस घटाने को लेकर सारी कवायद तेज कर दी गयी है। कार्यदायी संस्था को काम पूरा करने के लिए आठ महीने का मौका दिया है। मार्च-2024 तक इसे मूर्त रूप दे दिया जाएगा।
मुख्य अभियंता दीपक अग्रवाल ने बताया कि हाइटेंशन 33 केवीए लाइन में फॉल्ट आने के बाद बिजली व्यवस्था बाधित नहीं होगी। इसे लिंक लाइन से जोड़कर आपूर्ति दी जा सकेगी। पुर्नोत्थान वितरण क्षेत्र योजना के तहत लिंक लाइन तैयार की जाएगी। इसके लिए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की ओर से मंडल को 434 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
वहीं विद्युत उपकेंद्रों के फीडरों से 11 हजार लाइन से घरों तक सुचारू रूप से बिजली सप्लाई की जाएगी। जर्जर लाइनों को हटाकर जरूरत के हिसाब से नई बिछाई जाएगी। समग्र तकनीकी वाणिज्य घाटे को कम करने व सप्लाई में औसत लागत को भी शून्य करने के लिए कराए गए सर्वे के आधार पर विद्युत लाइनों में जरूरी सुधार किए जाएंगे। जिसके तहत लोड कम करने के लिए 62 नए फीडर अतिशीघ्र तैयार होकर काम करने लगेंगे।
बिजली चोरी की आशंकाओं वाले क्षेत्रों पर बंद केबिल व्यवस्था समेत विशेष प्रबंध किए जाएंगे। जिसके बाद मांग के अनुसार विद्युत आपूर्ति की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि मंडल के गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर में काम शुरू हो चुका है। कार्यदायी संस्था नागार्जुन कंस्ट्रक्शन को मार्च 2024 तक मौका दिया है। (संवाद)
जनपद- खर्च (करोड़ में)
गोंडा - 174.63
बहराइच - 119.77
बलरामपुर - 89.39
श्रावस्ती - 49.97
560 से बढ़कर 725 मेगावाट बिजली की खपत
मुख्य अभियंता ने बताया कि मंडल में पिछले साल एक दिन में जहां 560 मेगावाट बिजली की खपत थी। वहीं इस बार 725 मेगावाट अधिकतम बिजली की खपत रही है। बारिश के बावजूद भी 650 मेगावाट खपत हो रही है। ऐसे में क्षमता से अधिक बिजली इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसके चलते लगातार समस्याएं आ रही हैं।