बाराबंकी। जर्जर तार, घिस चुके कंडक्टर, टूटे खंभों से जल्द ही जिले के लोगों को निजात मिलेेगी। पावर कॉरपोरेशन ने लाइनों की मरम्मत के लिए सर्वे शुरु कर दिया है। इस काम में करीब 25 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है। उन जगहों पर भी लाइनें दुरस्त की जाएंगी जहां आग लगने या लोगों के करंट की चपेट में आने का खतरा बना रहता है।
जिले में पावर कॉरपोरेशन के पांच डिवीजन बाराबंकी, हैदरगढ़, फतेहपुर, रामनगर व रामसनेहीघाट हैं। बीते एक-दो सालों में आंधी या अन्य कारणों से करीब 150 किमी लाइनें क्षतिग्रस्त हुईं। 100 से अधिक खंभे टूटे या तो बदलने लायक हो गए। शहर की बात करें तो धनोखर, बेगमगंज, लखपेड़ाबाग, रसूलपुर, पीरबटावन, अभयनगर आदि मोहल्लों में कई जगह बिजली की लाइनें कमजोर खंभों व घिसे हुए कंडक्टरों के भरोसे चल रही है। कई ट्रांसफार्मर ऐसे है जिनकी जालियां गायब हो गई है। कुछ महीने पहले इसकी रिपोर्ट कॉरपोरेशन को भेजी गई थी। इस रिपोर्ट में नए ट्रांसफार्मर लगाने, तारों को खींचने, सब स्टेशन की स्थापना का काम भी शामिल था। शासन ने इन सभी कार्यों के लिए 180 करोड़ का बजट कॉरपाेरेशन को दिया है। अब विभाग इसी धनराशि में से जर्जर लाइनों को दुरस्त कराएगा। पांचों डिविजन में इसका सर्वे तेजी से चल रहा है। वे स्थान चिंहित किए जा रहे हें जहां सुधार, मरम्मत या नवीनीकरण की आवश्यकता है। अधिकारियों के अनुसार इस काम में करीब 25 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
300 विद्यालयों पर मंडराता खतरा कब हटेगा
जिले के करीब 300 विद्यालयों के ऊपर या ठीक बगल से गुजारी लाइनों से करीब डेढ़ लाख नौनिहालों के सिर पर खतरा मंडरा रहा है। इनमें 167 परिषदीय विद्यालयों व करीब डेढ़ सौ निजी स्कूल हैं। पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों का तर्क है कि एचटी लाइन वहीं खींची जाती है, जहां पर आबादी, स्कूल, मकान आदि न हो। अधिकतर निर्माण बाद में हुए हैं। बीएसए संतोष देव पांडेय ने बताया कि इसे लेकर पावर कॉरपाेरेशन को विभाग द्वारा कई पत्र लिखे जा चुके हैं।
जिले में ऐसी जगहें चिंहित की जा रही है जहां सुधार की आवश्यकता है। सर्वे समाप्त होने के बाद जर्जर तार, घिस चुके कंडक्टर, टूटे खंभों को बदला जाएगा। उपकेंद्र में अगर फीडर बड़ा है तो उसे दो भागों में विभाजित किया जाएगा। लाइन लॉस कम करने के लिए एबीसी लगाई जाएगी इसके साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से सभी कार्य कराए जाएंगे। सर्वे इसी मार्च माह में समाप्त होने की संभावना है।
- मनोज सोनकर, अधीक्षण अभियंता, पावर कार्पोरेशन