गोंडा। ड्यूटी के दौरान यूपी 112 के मुख्य आरक्षी पर जानलेवा हमले के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आरोपी अभियुक्तों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अदालत ने वादी पुलिसकर्मी के आचरण की जांच का आदेश देते हुए पुलिस अधीक्षक को कोर्ट में व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है।
यूपी 112 के वाहन (यूपी 32 डीजी 5657) पर तैनात मुख्य आरक्षी गिरजा शंकर ने थाने में केस दर्ज कराया था। उन्होंने कहा कि वह वाहन चालक ओमप्रकाश तिवारी के साथ सात जून 2025 की शाम परसपुर के ग्राम सकरौर के मजरा हाथी बोर गए थे। उन्हें सूचना मिली थी कि वहां राम भवन के घर पर श्रवण व उनके परिजनों द्वारा मारपीट की जा रही है। बाइक तोड़ दी गई है। दर्ज मुकदमे के अनुसार वहां पहुंचने पर दोनों पक्ष नाराज हो गए और श्रवण, रामलखन, शिवबचन और लल्ला ने जानलेवा हमला कर दिया। वर्दी फाड़ दी और सीटी व डोरी खींचकर तोड़ दी। विवेचना के दौरान पुलिस ने आठ जून 2025 को आरोपी रामलखन और शिवबचन को गिरफ्तार कर लिया। इस बीच श्रवण, लल्ला, राम सुंदर व अन्य आरोपियों ने उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल की। इसमें प्रथम सूचना रिपोर्ट को निरस्त करने की मांग की।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि रामलखन और उसके भाई रामभवन के बीच हुआ विवाद समाप्त हो गया था, लेकिन मौके पर पहुंचे मुख्य आरक्षी पेट्रोल खर्च के पांच हजार रुपये मांगने लगे। रकम देने से इन्कार करने पर उन्होंने परिजनों पर हमला कर पीटा और घर के सामान में तोड़फोड़ की।
बृहस्पतिवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह ने मामले के तथ्य, साक्ष्य और याची के अधिवक्ता की ओर से प्रस्तुत तर्कों पर विचार करते हुए सुनवाई की अग्रिम तिथि 13 अगस्त 2025 तक याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अदालत ने पुलिस अधीक्षक को आरक्षी गिरजाशंकर के आचरण की जांच करके कोर्ट में व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है।