गोंडा। मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल जन आरोग्य मेला खानापूर्ति तक सीमित रह जाता है। रविवार को जिले के 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मेले का आयोजन किया गया, लेकिन कहीं डॉक्टर नहीं मिले तो कहीं चपरासी ने दवाएं बांटकर कर्तव्यों की इतिश्री कर दी।
बभनान संवाद
के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जमुनहा में मेले में एलोपैथिक का कोई डॉक्टर नहीं दिखा। आयुष चिकित्सक डॉ. एमए खान आयुर्वेदिक उपचार कर रहे थे। वहीं एक चपरासी मरीजों को एलोपैथिक दवाएं बांटकर घर भेज रहा था। जबकि पास बैठे फार्मासिस्ट केके तिवारी मोबाइल में व्यस्त रहे। दोपहर एक बजकर 20 मिनट तक कुल 35 मरीजों का उपचार किया गया। इसके अलावा परिसर में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप दूषित पानी दे रहा था, जिससे मरीजों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल सका।
इटियाथोक संवाद के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तकिया मनोहर में डॉ. दुर्गविजय ने 19 मरीजों का उपचार किया। पीएचसी बाबागंज में आरबीएसके की चिकित्सक पूनम गुप्ता ने 17 मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की। यहां पर एमबीबीएस चिकित्सक मौजूद नहीं थे।
परसपुर संवाद
के अनुसार पीएचसी भौरीगंज में दोपहर 12 बजे तक आंख, स्किन, गैस से पीड़ित कुल 12 मरीजों का उपचार किया गया। इस दौरान आयुष चिकित्सक डॉ. रवींद्रनाथ, फार्मासिस्ट अनूप कुमार सिंह, एएनएम नीता देवी आदि रहे। यहां अस्पताल का नाम व पता तक नहीं अंकित कराया गया है।
मसकनवा संवाद के अनुसार छपिया सीएचसी के तीनों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ चिकित्सक की ड्यूटी नहीं लगाई गई थी। आयुष चिकित्सकों के सहारों इलाज की खानापूर्ति की गई। दोपहर तक कुल 36 मरीजों का उपचार हुआ। करनैलगंज संवाद
के अनुसार पीएचसी बरगदी कोट में जन आरोग्य मेले की खानापूर्ति की गई।