जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रमेश चंद्र ने बताया कि जिले में अभी 19 मदरसे बिना मान्यता के साथ ही 286 मकतब भी संचालित किए जा रहे हैं। पिछले दिनों एटीएस महानिदेशक ने प्रदेश के गैरमान्यता प्राप्त मदरसों की जांच के आदेश दिए थे। आशंका है कि नेपाल सीमा से जिलों में संचालित कुछ मदरसों में विदेशी फंडिंग हो रही है। धानेपुर थानाध्यक्ष सुनील सिंह ने बताया कि करीब छह मदरसे में एटीएस पहुंची है। संचालकों से भूमि समेत संचालन संबंधी सभी दस्तावेज मांगे गए हैं।
एटीएस टीम ने ग्राम पंचायत श्रीनगर, उज्जैनी कला के साबलपुरवा, पठान पुरवा, शेख पुरवा, डबरी कला में संचालित मदरसों की जांच की।
मदरसा संचालकों के अनुसार एटीएस करीब सात बिंदुओं पर जांच कर रही है। इसमें सबसे ज्यादा फोकस इस बात पर है कि मदरसों के संचालन के लिए पैसा कहां से आ रहा है। पैसा जो लोग दे रहे हैं उनकी कमाई का जरिया क्या है और वे लोग कहां के रहने वाले हैं। मदरसों के संचालन में किसी विदेशी गलत एजेंसी की फंडिंग तो नहीं हो रही है। एटीएस पूछ रही है कि मदरसों का संचालन किस आधार पर हो रहा है, जो कर्मी इनमें नियुक्त हैं वह कहां के रहने वाले हैं। उनका वेतन कहां से और कैसे दिया जाता है। जो बच्चे पढ़ते हैं वह कहां के निवासी हैं। पढ़ने वाले बच्चे कहां रुकते हैं, किस भवन में उनको पढ़ाया जा रहा है, भवन मालिक कौन है।