घाघरा व सरयू नदियों में उफान जारी है। रविवार शाम चार बजे एल्गिन ब्रिज के पास घाघरा खतरे के निशान से 27 सेंटीमीटर ऊपर बहने लगी है। घाघरा ने परसावल गांव में बने आंगनबाड़ी केंद्र को समा लिया। इससे पहले गांव का जूनियर स्कूल घाघरा में समाहित हो चुका है। रविवार को बाढ़ ने करीब एक हजार हेक्टेयर भूमि को भी आगोश में ले लिया है।
पहाड़ी नालों, बैराजों एवं बरसाती पानी से घाघरा नदी पूरी तरह उफान पर है। रविवार को नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने का सिलसिला जारी रहा। नदी के किनारे बसे तीन ग्राम पंचायतों परसावल, कमियार व नैपुरा पूरी तरह बाढ़ के पानी से जलमग्न हो चुके हैं। तीनों ग्राम पंचायतों की करीब 12 हजार की आबादी बेघर होने के साथ ही सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुकी है।
शनिवार रात में नदी की कटान में परसावल का आंगनबाड़ी केंद्र भी आ गया। पूरा भवन नदी में समा गया। करीब एक हजार बीघे से अधिक भूमि कटकर नदी में समा गई। ग्रामीणों में दृगपाल यादव, रामनेवाज, लल्ला, इंसपेक्टर यादव आदि ने बताया कि बाढ़ के बावजूद प्रशासन ग्रामीणों की कोई भी मदद नहीं कर रहा है। अपने संसाधनों से लोग स्वयं बचाव करने में जुटे हुए हैं।
बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिरे तहसील करनैलगंज की ग्राम पंचायत चन्दापुर किटौली के तीनों मजरों धुसवा, नाऊपुरवा, बिचलापुरवा में पानी घुुसने लगा है। एसडीएम अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है। वहां पर राजस्व कर्मचारियों की टीम को तैनात कर दिया गया है तथा जो बाढ़ पीड़ित गांव से बाहर निकलना चाहते हैं, उनके लिए अलग से नाव की सुविधा मुहैया करा दी गई।