गोंडा। आपातकाल में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस सेवा खुद ही वेंटिलेटर पर है। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि आपातकाल में एंबुलेंस को कॉल करने पर उसे पहुंचने में आधा से एक घंटा तक लग जा रहा है। जबकि एंबुलेंस को मौके पर पहुंचने का समय सात से 15 मिनट का होना चाहिए। स्थिति यह है कि रिस्पांस टाइम के हिसाब से गोंडा जिला को प्रदेश के 75 में से 70वां स्थान मिला है।
मातृत्व मामले में डिलीवरी का मामला हो या फिर सड़क दुर्घटना हुई हो, दोनों ही परिस्थितियों में एंबुलेंस को एक उम्मीद के रूप में देखा जाता है, लेकिन यदि एंबुलेंस के पहुंचने में देर होती है तो जान जाने का खतरा भी हो जाता है। ऐसे में जिले में एंबुलेंस के रिस्पांस टाइम का ज्यादा होना स्वास्थ्य विभाग के साथ ही आम आदमी के स्वास्थ्य के लिए खतरा है। स्वास्थ्य विभाग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सीएमओ से इस संबंध में जवाब मांगा है।
वर्जन
एंबुलेंस संचालक को दिया जा रहा नोटिस
एसीएमओ डॉ. एके वर्मा ने बताया कि जिले में एंबुलेंस के रिस्पांस टाइम के संबंध में चालकों व संचालक कमेटी को सचेत किया गया है। प्रदेश में 70वां स्थान होने व रिस्पांस टाइम अन्य जिलों से ज्यादा होने के कारणों की पड़ताल की जा रही है। एंबुलेंस चालक को हर हाल में समय पर पहुंचना होगा। एसीएमओ ने कहा कि एंबुलेंस सेवा के समन्वयक को नोटिस दिया जा रहा है।
रैंकिंग पर उठाए सवाल
जिले में 102 एंबुलेंस के 40 वाहन हैं, जिसकी वर्तमान स्थिति काफी अच्छी है। समय पर पहुंचने में 102 एंबुलेंस प्रदेश में टाॅपर है। 108 एंबुलेंस का समय जरूर ज्यादा है, लेकिन यह प्रदेश में 45 नंबर से ज्यादा नहीं होना चाहिए। पता नहीं कैसे यह रैंकिंग जारी कर दी गई। - संजय पांडेय, प्रोग्राम मैनेजर, 108 व 102 एंबुलेंस सेवा