गोंडा। मानसून से पहले बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार को जिला पंचायत सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं, राहत कार्यों और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की हुई। बैठक में गोरखपुर की तर्ज पर गोंडा में भी स्थायी बाढ़ राहत भवन बनाने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि आपदा के समय बड़ी संख्या में प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम मिश्र ने की। विधायक तरबगंज प्रेम नरायन पांडेय ने कहा कि हर वर्ष बाढ़ आने के बाद राहत कार्यों पर जोर दिया जाता है, जबकि जरूरत स्थायी समाधान की है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां तटबंध कमजोर हैं, वहां समय रहते मरम्मत कार्य पूरा कराया जाए। साथ ही जिन किसानों की भूमि अधिग्रहण या बैनामे के मामलों में फंसी हुई है, उसका निस्तारण प्राथमिकता पर कराया जाए ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों। करनैलगंज विधायक अजय सिंह ने अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की सूची तैयार कर समय रहते आवश्यक मरम्मत कार्य कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में बाढ़ प्रभावित गांवों तक पहुंचने वाले मार्गों की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां सुरक्षा के सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही तटबंधों, नालों और जल निकासी व्यवस्था की नियमित निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राहत सामग्री, नाव, दवाएं और पशुओं के चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पहले से तैयारी की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संभावित बीमारियों की रोकथाम के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। वहीं पशुपालन विभाग को पशुओं के टीकाकरण और चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में विधायक बावन सिंह, विनय कुमार द्विवेदी, प्रभात वर्मा, कैसरगंज सांसद प्रतिनिधि संजीव सिंह, गोंडा सांसद प्रतिनिधि रमाशंकर मिश्र, भाजपा जिलाध्यक्ष अकबाल बहादुर तिवारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।